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महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva

by महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास

DevanagariSanskritpublished2,256 pages

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थी। उसका रूप-सौन्दर्य अवर्णनीय था। तरुणावस्था भी अद्भुत थी। उस सुन्दरी अप्सराको मुनिवर विश्वामित्रने वहाँ नंगी देख लिया ॥ ५६ ॥ तस्या रूपगुणान् दृष्ट्वा स तु विप्रर्षभस्तदा । चकार भावं संसर्गात् तया कामवशं गतः ॥ ७ ॥ उसके रूप और गुणोंको देखते ही विप्रवर विश्वामित्र कामके अधीन हो गये। सम्पर्कमें आनेके कारण मेनकामें उनका अनुराग हो गया ॥ ७ ॥ न्यमन्त्रयत चाप्येनां सा चाप्यैच्छदनिन्दिता । तौ तत्र सुचिरं कालमुभौ व्यहरतां तदा ॥ ८ ॥ रममाणौ यथाकामं यथैकदिवसं तथा । (कामक्रोधावजितवान् मुनिर्नित्यं क्षमान्वितः । चिरार्जितस्य तपसः क्षयं स कृतवानृषिः ॥ तपसः संक्षयादेव मुनिर्मोहं समाविशत् । कामरागाभिभूतस्य मुनेः पार्श्वं जगाम सा ॥) जनयामास स मुनिर्मेनकायां शकुन्तलाम् ॥ ९ ॥ प्रस्थे हिमवतो रम्ये मालिनीमभितो नदीम् । जातमुत्सृज्य तं गर्भं मेनका मालिनीमनु ॥ १० ॥ कृतकार्या ततस्तूर्णमगच्छच्छक्रसंसदम् । तं वने विजने गर्भं सिंहव्याघ्रसमाकुले ॥ ११ ॥ दृष्ट्वा शयानं शकुनाः समन्तात् पर्यवारयन् । नेमां हिंस्युर्वने बालां क्रव्यादा मांसगृद्धिनः ॥ १२ ॥ उन्होंने मेनकाको अपने निकट आनेका निमन्त्रण दिया। अनिन्द्य सुन्दरी मेनका तो यह चाहती ही थी, उनसे सम्बन्ध स्थापित करनेके लिये वह राजी हो गयी। तदनन्तर वे दोनों वहाँ सुदीर्घ कालतक इच्छानुसार विहार तथा रमण करते रहे। वह महान् काल उन्हें एक दिनके समान प्रतीत हुआ। काम और क्रोधपर विजय न पा सकनेवाले उन सदा क्षमाशील महर्षिने दीर्घकालसे उपार्जित की हुई तपस्याको नष्ट कर दिया। तपस्याका क्षय होनेसे मुनिके मनपर मोह छा गया। तब मेनका काम तथा रागके वशीभूत हुए मुनिके पास गयी। ब्रह्मन्! फिर मुनिने मेनकाके गर्भसे हिमालयके रमणीय शिखरपर मालिनी नदीके किनारे शकुन्तलाको जन्म दिया। मेनकाका काम पूरा हो चुका था; वह उस नवजात गर्भको मालिनीके तटपर छोड़कर तुरंत इन्द्र-लोकको चली गयी। सिंह और व्याघ्रोंसे भरे हुए निर्जन वनमें उस शिशुको सोते देख शकुन्तों (पक्षियों)-ने उसे सब ओरसे पाँखोंद्वारा ढक लिया; जिससे कच्चे मांस खानेवाले गीध आदि जीव वनमें इस कन्याकी हिंसा न कर सकें ॥ ८—१२ ॥ पर्यरक्षन्त तां तत्र शकुन्ता मेनकात्मजाम् ।