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महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva

by महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास

DevanagariSanskritpublished2,256 pages

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Page 537

षड्वर्ष एव बालः स कण्वाश्रमपदं प्रति ॥ ५ ॥ सिंहव्याघ्रान् वराहांश्च महिषांश्च गजांस्तथा । बबन्ध वृक्षे बलवानाश्रमस्य समीपतः ॥ ६ ॥ देवताओंके बालक-सा प्रतीत होनेवाला वह तेजस्वी कुमार वहाँ शीघ्रतापूर्वक बढ़ने लगा। छः वर्षकी अवस्थामें ही वह बलवान् बालक कण्वके आश्रममें सिंहों, व्याघ्रों, वराहों, भैंसों और हाथियोंको पकड़कर खींच लाता और आश्रमके समीपवर्ती वृक्षोंमें बाँध देता था॥ ५-६॥ आरोहन् दमयंश्चैव क्रीडंश्च परिधावति । (ततश्च राक्षसान् सर्वान् पिशाचांश्च रिपून् रणे । मुष्टियुद्धेन ताञ्जित्वा ऋषीणाराधयत् तदा ॥ कश्चिद् दितिसुतस्तं तु हन्तुकामो महाबलः । वध्यमानांस्तु दैतेयानमर्षी तं समभ्ययात् ॥ तमागतं प्रहस्यैव बाहुभ्यां परिगृह्य च । दृढं चाबध्य बाहुभ्यां पीडयामास तं तदा ॥ मर्दितो न शशाकास्य मोचितुं बलवत्तया । प्राक्रोशद् भैरवं तत्र द्वारेभ्यो निःसृतं त्वसृक् ॥ तेन शब्देन वित्रस्ता मृगाः सिंहादयो गणाः । सुस्रुवुश्च शकृन्मूत्रमाश्रमस्थाश्च सुस्रुवुः ॥ निरसुं जानुभिः कृत्वा विससर्ज च सोऽपतत् । तं दृष्ट्वा विस्मयं चक्रुः कुमारस्य विचेष्टितम् ॥ नित्यकालं वध्यमाना दैतेया राक्षसैः सह । कुमारस्य भयादेव नैव जग्मुस्तदाश्रमम् ॥) ततोऽस्य नाम चक्रुस्ते कण्वाश्रमनिवासिनः ॥ ७ ॥ फिर वह सबका दमन करते हुए उनकी पीठपर चढ़ जाता और क्रीड़ा करते हुए उन्हें सब ओर दौड़ाता हुआ दौड़ता था। वहाँ सब राक्षस और पिशाच आदि शत्रुओंको युद्धमें मुष्टिप्रहारके द्वारा परास्त करके वह राजकुमार ऋषि-मुनियोंकी आराधनामें लगा रहता था। एक दिन कोई महाबली दैत्य उसे मार डालनेकी इच्छासे उस वनमें आया। वह उसके द्वारा प्रतिदिन सताये जाते हुए दूसरे दैत्योंकी दशा देखकर अमर्षमें भरा हुआ था। उसके आते ही राजकुमारने हँसकर उसे दोनों हाथोंसे पकड़ लिया और अपनी बाँहोंमें दृढ़तापूर्वक कसकर दबाया। वह बहुत जोर लगानेपर भी अपनेको उस बालकके चंगुलसे छुड़ा न सका, अतः भयंकर स्वरसे चीत्कार करने लगा। उस समय दबावके कारण उसकी इन्द्रियोंसे रक्त बह चला। उसकी चीत्कारसे भयभीत हो मृग और सिंह आदि जंगली जीव मल-मूत्र करने लगे तथा आश्रमपर रहनेवाले प्राणियोंकी भी यही दशा हुई। दुष्यन्तकुमारने घुटनोंसे मार-