महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व
Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva
by महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास
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Read in contextतब ययातिने उससे कहा—तुम मेरा बुढ़ापा ले लो और मैं तुम्हारी जवानीसे विषयोपभोग करूँगा॥ ४० ॥ यजतो दीर्घसत्रैर्मे शापाच्चोशनसो मुनेः । कामार्थः परिहीणोऽयं तप्येयं तेन पुत्रकाः ॥ ४१ ॥ ‘पुत्रो! अबतक तो मैं दीर्घकालीन यज्ञोंके अनुष्ठानमें लगा रहा और अब मुनिवर शुक्राचार्यके शापसे बुढ़ापेने मुझे धर दबाया है, जिससे मेरा कामरूप पुरुषार्थ छिन गया। इसीसे मैं संतप्त हो रहा हूँ’ ॥ ४१ ॥ मामकेन शरीरेण राज्यमेकः प्रशास्तु वः । अहं तन्वाभिनवया युवा काममवाप्नुयाम् ॥ ४२ ॥ ‘तुममेंसे कोई एक व्यक्ति मेरा वृद्ध शरीर लेकर उसके द्वारा राज्यशासन करे। मैं नूतन शरीर पाकर युवावस्थासे सम्पन्न हो विषयोंका उपभोग करूँगा’ ॥ ४२ ॥ ते न तस्य प्रत्यगृह्णन् यदुप्रभृतयो जराम् । तमब्रवीत् ततः पूरुः कनीयान् सत्यविक्रमः ॥ ४३ ॥ राजंश्चराभिनवया तन्वा यौवनगोचरः । अहं जरां समादाय राज्ये स्थास्यामि तेऽऽज्ञया ॥ ४४ ॥ राजाके ऐसा कहनेपर भी वे यदु आदि चार पुत्र उनकी वृद्धावस्था न ले सके। तब सबसे छोटे पुत्र सत्यपराक्रमी पूरुने कहा—‘राजन्! आप मेरे नूतन शरीरसे नौजवान होकर विषयोंका उपभोग कीजिये। मैं आपकी आज्ञासे बुढ़ापा लेकर राज्यसिंहासनपर बैठूँगा’ ॥ ४३-४४ ॥ एवमुक्तः स राजर्षिस्तपोवीर्यसमाश्रयात् । संचारयामास जरां तदा पुत्रे महात्मनि ॥ ४५ ॥ पूरुके ऐसा कहनेपर राजर्षि ययातिने तप और वीर्यके आश्रयसे अपनी वृद्धावस्थाका अपने महात्मा पुत्र पूरुमें संचार कर दिया ॥ ४५ ॥ पौरवेणाथ वयसा राजा यौवनमास्थितः । यायातेनापि वयसा राज्यं पूरुरकारयत् ॥ ४६ ॥ ययाति स्वयं पूरुकी नयी अवस्था लेकर नौजवान बन गये। इधर पूरु भी राजा ययातिकी अवस्था लेकर उसके द्वारा राज्यका पालन करने लगे ॥ ४६ ॥ ततो वर्षसहस्राणि ययातिरपराजितः । स्थितः स नृपशार्दूलः शार्दूलसमविक्रमः ॥ ४७ ॥ तदनन्तर किसीसे परास्त न होनेवाले और सिंहके समान पराक्रमी नृपश्रेष्ठ ययाति एक सहस्र वर्षतक युवावस्थामें स्थित रहे ॥ ४७ ॥ ययातिरपि पत्नीभ्यां दीर्घकालं विहृत्य च । विश्वाच्या सहितो रेमे पुनश्चैत्ररथे वने ॥ ४८ ॥