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महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

by महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास

DevanagariSanskritpublished3,237 pages

Page 3183 of 3237

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Page 3183

'जिसके पास पहले राजा लोग बैठकर उसे आनन्द प्रदान करते थे, आज मरकर धरतीपर पड़े उसी वीरके पास गीध बैठे हुए हैं ।। १४ ।। यं पुरा व्यजनै रम्यैरुपवीजन्ति योषितः । तमद्य पक्षव्यजनैरुपवीजन्ति पक्षिणः ॥ १५ ॥ 'पहले जिसके पास खड़ी होकर युवतियाँ सुन्दर पंखे झला करती थीं, आज उसीको पक्षीगण अपनी पाँखोंसे हवा करते हैं ।। १५ ।। एष शेते महाबाहुर्बलवान् सत्यविक्रमः । सिंहेनेव द्विपः संख्ये भीमसेनेन पातितः ॥ १६ ॥ 'यह महाबाहु सत्यपराक्रमी बलवान् वीर दुर्योधन भीमसेनके द्वारा गिराया जाकर युद्धस्थलमें सिंहके मारे हुए गजराजके समान सो रहा है ।। १६ ।। पश्य दुर्योधनं कृष्ण शयानं रुधिरोक्षितम् । निहतं भीमसेनेन गदां सम्मृज्य भारतम् ॥ १७ ॥ 'श्रीकृष्ण! भीमसेनकी चोट खाकर खूनसे लथपथ हो गदा लिये धरतीपर सोये हुए दुर्योधनको अपनी आँखसे देख लो ।। १७ ।। अक्षौहिणीर्महाबाहुर्दश चैकां च केशव । आनयद् यः पुरा संख्ये सोऽनयान्निधनं गतः ॥ १८ ॥ 'केशव! जिस महाबाहु वीरने पहले ग्यारह अक्षौहिणी सेनाओंको जुटा लिया था, वही अपनी अनीतिके कारण युद्धमें मार डाला गया ।। १८ ।। एष दुर्योधनः शेते महेष्वासो महाबलः । शार्दूल इव सिंहेन भीमसेनेन पातितः ॥ १९ ॥ 'सिंहके मारे हुए दूसरे सिंहके समान भीमसेनके हाथों मारा गया यह महाबली महाधनुर्धर दुर्योधन सो रहा है ।। १९ ।। विदुरं ह्यवमत्यैष पितरं चैव मन्दभाक् । बालो वृद्धावमानेन मन्दो मृत्युवशं गतः ॥ २० ॥ 'यह मूर्ख और अभागा बालक विदुर तथा अपने पिताका अपमान करके बड़े-बूढ़ोंकी अवहेलनाके पापसे ही कालके गालमें चला गया है ।। २० ।। निःसपना मही यस्य त्रयोदश समाः स्थिता । स शेते निहतो भूमौ पुत्रो मे पृथिवीपतिः ॥ २१ ॥ 'यह सारी पृथ्वी तेरह वर्षोंतक निष्कण्टकभावसे जिसके अधिकारमें रही है, वही मेरा पुत्र पृथ्वीपति दुर्योधन आज मारा जाकर पृथ्वीपर पड़ा है ।। २१ ।। अपश्यं कृष्ण पृथिवीं धार्तराष्ट्रानुशासिताम् । पूर्णां हस्तिगवाश्वैश्च वार्ष्णेय न तु तच्चिरम् ॥ २२ ॥