महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व
Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva
by महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास
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Read in contextतब 'बहुत अच्छा' कहकर कुन्तीनन्दन युधिष्ठिर पितामहको प्रणाम करके परिवारसहित हस्तिनापुरकी ओर चल दिये ।। १५ ।।
धृतराष्ट्रं पुरस्कृत्य गान्धारीं च पतिव्रताम् ।
सह तैर्ऋषिभिः सर्वैर्भ्रातृभिः केशवेन च ।। १६ ।।
पौरजानपदैश्चैव मन्त्रिवृद्धैश्च पार्थिव ।
प्रविवेश कुरुश्रेष्ठः पुरं वारणसाह्वयम् ।। १७ ।।
राजन्! उन कुरुश्रेष्ठ युधिष्ठिरने राजा धृतराष्ट्र और पतिव्रता गान्धारी देवीको आगे करके समस्त ऋषियों, भाइयों, श्रीकृष्ण, नगर और जनपदके लोगों तथा बड़े-बूढ़े मन्त्रियोंके साथ हस्तिनापुरमें प्रवेश किया ।। १६-१७ ।।
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि भीष्मानुज्ञायां षट्षष्ट्यधिकशततमोऽध्यायः ।। १६६ ।।
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें भीष्मकी अनुमतिविषयक एक सौ छाछठवाँ अध्याय पूरा हुआ ।। १६६ ।।