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महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva

by महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास

DevanagariSanskritpublished2,566 pages

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धर्मिष्ठ राजा श्रेष्ठ कुलोंको विशेष प्रोत्साहन देते थे। वे मनुकी बनायी हुई राजनीतिके अनुसार इस वसुधाका शासन करते थे ।। राजवृत्तिर्हि सा शश्वद् धर्मिष्ठाभून्महीतले । प्रायो लोकमतिस्तात राजवृत्तानुगामिनी ।। तात! इस पृथ्वीपर राजाओंके बर्ताव सदा धर्मानुकूल होते थे। प्रायः लोगोंकी बुद्धि राजाके ही बर्तावका अनुसरण करनेवाली होती है ।। एवं भारतवर्षं स्वं राजा स्वर्गं सुरेन्द्रवत् । शशास विष्णुना सार्धं गुप्तो गाण्डीवधन्वना ।।) जैसे इन्द्र स्वर्गका शासन करते हैं, उसी प्रकार गाण्डीवधारी अर्जुनसे सुरक्षित राजा युधिष्ठिर भगवान् श्रीकृष्णके सहयोगसे अपने राज्य—भारतवर्षका शासन करते थे ।।

इति श्रीमहाभारते आश्वमेधिके पर्वणि अश्वमेधपर्वणि चतुर्दशोऽध्यायः ।। १४ ।। इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्वमेधिकपर्वके अन्तर्गत अश्वमेधपर्वमें चौदहवाँ अध्याय पूरा हुआ ।। १४ ।। (दाक्षिणात्य अधिक पाठके ३३ १/३ श्लोक मिलाकर कुल ४७ १/३ श्लोक हैं)