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मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)

मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)

Manusmriti with Kulluka Bhatta Tika & Hindi Translation

by महर्षि मनु

Source: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (origin)

DevanagariSanskritpublished649 pages

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७२ · मनुस्मृति । · दश पूर्वान्परान्वंश्यानात्मानं चैकविंशकम् । ब्राह्मीपुत्रः सुकृतकृन्मोचयेदेनसः पितॄन् ॥ ३७ ॥ दैवोढाजः सुतश्चैव सप्त सप्त परावरान् । आर्षोढाजः सुतस्त्रींस्त्रीन् षट्षट् कायोढजः सुतः ॥३८॥ ब्राह्मादिषु विवाहेषु चतुर्ष्वेवानुपूर्वशः । ब्रह्मवर्चस्विनः पुत्रा जायन्ते शिष्टसंमताः ॥ ३६ ॥ ब्राह्म विवाह से पैदा हुआ पुत्र सुकर्म करे तो अपने पिता- पितामह आदि दश पूर्वपुरुषों को और पुत्र-पौत्र आदि दश आगे के वंशजों को और इक्कीसवें अपनी आत्मा को पाप से मुक्त करता है। दैव विवाह का पुत्र सात पीढ़ी पहली और सात आगे की, आर्ष विवाह का तीन पीढ़ी पहली और तीन आगे की, और प्राजापत्य का छः पीढ़ी पहली और छः आगे की-और अपने को तारता है। क्रम से ब्राह्म आदि चार विवाहों से जो सन्तान होती है वह तेजस्वी और शिष्ट पुरुषों में मान्य होती है ॥ ३७-३६ ॥ रूपसत्त्वगुणोपेता धनवन्तो यशस्विनः । पर्याप्तभोगा धर्मिष्ठा जीवन्ति च शतं समाः॥ ४० ॥ इतरेषु तु शिष्टेषु नृशंसाऽनृतवादिनः । जायन्ते दुर्विवाहेषु ब्रह्मधर्मद्विषः सुताः ॥ ४१ ॥ अनिन्दितैः स्त्रीविवाहैरनिन्द्या भवति प्रजा । निन्दितैर्निन्दिता नॄणां तस्मान्निन्द्यान्विवर्जयेत्॥४२॥ पाणिग्रहणसंस्कारः सवर्णासूपदिश्यते । असवर्णास्वयं ज्ञेयो विधिरुद्वाहककर्मणि ॥ ४३ ॥ ब्राह्म आदि विवाहों से पैदा हुए पुत्र, सुरूप, सत्त्वगुणी, धनवान्, यशस्वी, भोगी, धार्मिक होते हैं और सौ वर्ष जीते हैं। और दूषित विवाहों से पैदा हुए, कुकर्मी, झूठे और धर्मनिन्दक होते हैं। अच्छे

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