मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)
Mudrarakshasam of Vishakhadatta Hindi
by विशाखदत्त (अनुवादक: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र)
Source: Mudrarakshas Drama translated into Hindi by Bharatendu Harishchandra (1925) (origin)
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Read in contextउपसंहार ( उत्तर ) ख । १५५
इस नाटक पर वटेश्वर मैथिल पण्डित की एक टीका भी है। कहते है कि गुहसेन नामक किसी अपर पण्डित की भी एक टीका है, किन्तु देखने में नही आई । महाराज तजौर के पुस्तकालय में व्यासराज यज्वा की एक टीका और है।
चन्द्रगुप्त * की कथा विष्णुपुराण, भागवत आदि पुराणों में और बृहत्कथा मे वर्णित है। कहते है कि विकटपल्ली के राजा चंद्रदास का उपाख्यान लोगों ने इन्हीं कथाओ से निकाल लिया है। ५
महानन्द अथवा महापद्मनन्द भी शूद्रा के गर्भ से था, और कहते है कि चन्द्रगुप्त इस की एक नाइन स्त्री के पेट से पैदा हुआ था। यह पूर्वपीठिका में लिख आए है कि इन लोगो की राजधानी पाटलिपुत्र थी। इस पाटलिपुत्र (पटने) के विषय में यहा कुछ लिखना अवश्य हुआ। सूर्य्यवंशी सुदर्शन + राजा की पुत्री पाटली ने पूर्व में इस नगर को बसाया। कहते हैं कि कन्या के वंध्यापन के दुख और दुर्नाम से छुड़ाने को राजा ने एक नगर बसाकर उस का नाम पाटलिपुत्र रक्खा था। वायुपुराण मे “जरासन्ध के पूर्वपुरुष वसु राजा ने बिहार प्रान्त का राज्य संस्थापन किया” यह लिखा है। कोई कहते है कि “वेदों मे जिस वसु के यज्ञ का वर्णन है वही राज्यगिरि राज्य का संस्थापक है।” (जो लोग चरणाद्रि को राज्यगृह का पर्वत बतलाते हैं उन को केवल भ्रम है।) इस राज्य का प्रारम्भ चाहे जिस तरह हुआ हो पर जरासन्ध ही के समय से १० १५ २०
* प्रियदर्शी, प्रियदर्शन, चंद्र, चन्द्रगुप्त, श्रीचन्द्र, चंद्रश्री, मौर्य, यह सब चन्द्रगुप्त के नाम हैं, और चाणक्य, विष्णुगुप्त, द्रोमिल वा द्रोहिण, अंशुल, कौटिल्य, यह सब चाणक्य के नाम हैं।
+ सुदर्शन, सहस्रबाहु अर्जुन का भी नामान्तर था, किसी २ ने भ्रम से पाटला को शूद्रक की कन्या लिखा है।