मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)
Mudrarakshasam of Vishakhadatta Hindi
by विशाखदत्त (अनुवादक: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र)
Source: Mudrarakshas Drama translated into Hindi by Bharatendu Harishchandra (1925) (origin)
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उपसंहार ( अक्षर ) ख ।
इस नाटक के विषय मे विल्सन साहिब लिखते है कि यह नाटक और नाटकों से अति विचित्र है, क्योंकि इस में सम्पूर्ण राजनीति के व्यवहारों का वर्णन है। चन्द्रगुप्त (जो यूनानी लोगो का सैन्ड्रोकोत्तस Sandrocottus है) और पाटलिपुत्र, (जो यूरप की पालीबोत्तरा Palibothra है) के वर्णन का ऐतिहासिक नाटक होने के कारण यह विशेष दृष्टि देने के योग्य है।
इस नाटक का कवि विशाखदत्त, महाराज पृथु का पुत्र और सामन्त वटेश्वरदत्त का पौत्र था। इस लिखने से अनुमान होता है कि दिल्ली के अन्तिम हिन्दूराजा पृथ्वीराज चौहान ही का पुत्र विशाखदत्त है, क्योंकि अन्तिम श्लोक से विदेशी शत्रु की जय की ध्वनि पाई जाती है, भेद इतना ही है कि रायसे मे पृथ्वीराज के पिता का नाम सोमेश्वर और दादा का आनन्द लिखा है। मै यह अनुमान करता हूं कि सामन्तवटेश्वर इतने बड़े नाम को कोई शीघ्रता मे या लघु कर के कहे तो सोमेश्वर हो सकता है और सम्भव है कि चन्द ने भाषा मे सामन्त वटेश्वर को ही सोमेश्वर लिखा हो।
मेजर विल्फर्ड ने मुद्राराक्षस के कवि का नाम गोदावरीतीर निवासी अनन्त लिखा है, किन्तु यह केवल भ्रममात्र है। जितनी प्राचीन पुस्तकें उत्तर वा दक्षिण में मिली, किसी में अनन्त का नाम नही मिला है।