निराले सद्गुरु
Nirale Satguru
by साहिब बन्दगी
Source: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (origin)
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था। इसलिए नामी कहता कि चूड़ियाँ बेचकर आते हो तो यहाँ रुक लिया करो। कभी आश्रम में तो कभी उसके घर में रहता। एक दिन उसने अपने सामान सहित साइकिल वहाँ रखी और जम्मू आ गया।
राँजड़ी आकर उसने देखा कि पशुओं की देखभाल ठीक नहीं हो रही है। वो जानकार था, आपसे कहा-गुरुजी, कुछ देर यहाँ रहकर इनकी सेवा कर लेता हूँ। वो 5-6 महीने रहा। वो हार्ट का मरीज़ था, पर यह बात कभी उसने आपको नहीं बताई। एक दिन वो नहाकर ध्यान में बैठा तो उसका शरीर छूट गया। आपको ख़बर हुई।
आप इतना तेज़ दिमाग़ रखते हैं कि किसी भी समस्या को मिनटों में हल कर देते हैं, दुखी भी नहीं होते। अगर इंसानी तौर पर भी देखें तो जो गुण आपमें मिलते हैं, कहीं नहीं मिल सकते।
तो आपने कहा कि इसका पार्थिव शरीर इसके घर पहुँचाता हूँ। आपने सुल्तानपुर में फ़ोन किया; आश्रम वालों से पूछा कि जो एक आदमी चूड़ी बेचता था, किसके घर रुकता था। उन्होंने कहा कि शायद गोरखपुर का है। आपने पूछा कि घर का पता है कि नहीं? उन्होंने कहा- नहीं। आपने फिर रिजिस्टर में देखने को कहा, जिसमें नाम दान के बाद नाम लिखा जाता है। वहाँ पता भी लिखा जाता है। उसका गाँव मिल गया। आपने गाड़ी भेजी और बर्फ से साथ लाश भेज दी, कहा कि कहना-हार्ट का मरीज़ था, ऐसे-ऐसे चला गया। गाँव के लोग इकट्ठा हुए, कहा-वाह! क्या गुरुजी हैं, इतनी दूर पार्थिव शरीर भेजा है। कोई भाई भी नहीं पहुँचाता है। आप हमेशा बड़ी जिम्मेदारी से अपना काम करते हैं। पर छल-कपटों से भरे संसारी हृदयों में ये चीज़ें समाती नहीं हैं। वहाँ तो बस पाखण्डी ही डेरा डालकर बैठे रहते हैं।
धुन के पक्के हैं आप
आप अपनी धुन के पक्के हैं। लखनऊ में एक जगह सत्संग में बहुत ऊँचा आसन था। हवा के झोंकों से टैंट गिर गया। अब सूर्य की धूप