निराले सद्गुरु
Nirale Satguru
by साहिब बन्दगी
Source: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (origin)
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वो उसे किसी दूसरे को सौंप अपनी ड्यूटी पर चला गया, उसे कह गया कि इसका ध्यान रखना। वो भी ऐसे ही वहाँ आया था भण्डारे पर। वो भी चला गया। तीसरे दिन वो पागल उठा और चल पड़ा। जाते-जाते सड़क पार करते हुए वो गाड़ी के नीचे आ गया। वो मर गया। अब कोई पहचान नहीं पा रहा था कि यह कौन है। पुलिस ने लावारिस समझ मेडिकल हॉस्पिटल में भेज दिया।
एक आदमी ने कहा कि मुझे लगता है कि यह आश्रम से गया है। आपको ध्यान आया कि फौजी के साथ एक पागल आया था, दो दिन रुका था वो। आपने गाड़ी भेजी, कहा-उनसे पूछो कि जो लाश उठाई थी, वो कहाँ है? पुलिस वालों ने कहा कि वो मेडिकल हॉस्पिटल में भेजी है। आपने एक नामी डॉ० को फ़ोन किया और सारी बात बतायी। उन्होंने लाश दे दी। अब उसका पता न चले कि कहाँ का है। आपको वो लाश उसके घर पहुँचानी थी। आपने इसे अपनी ड्यूटी समझा, जिम्मेदारी समझा। दूसरा कोई होता तो इतनी मुसीबत न लेता।
आपको याद आया और फौजी का पता ढूँढ़ने लगे। पुरानी डायरी में लिखा था। आपने चरणसिंह के घर फ़ोन किया तो उसकी पत्नी ने उठाया, कहा कि वो तो ड्यूटी पर है। वहाँ का पता पूछा और उससे बात की; कहा कि जो पागल भेजा था, कहाँ का है? उसने कहा कि मुकेरियाँ का। पर पूरा पता नहीं था उसे। फिर जैसे-तैसे करके पता किया और आपने गाड़ी में भेजकर लाश वहाँ पहुँचाई। जब फौजी आया तो उसका बड़ा अपमान किया, कहा कि इसकी मौत का जिम्मेदार तू है; यदि मैं जज होता तो तुझे फाँसी चढ़ाना था। यदि तूने जाना था तो मुझे कह जाता, मैं किसी जिम्मेदार के हवाले कर देता इसे।
ऐसे ही एक आदमी चूड़ी बेचता था। उसके तीन-चार बच्चे थे। साइकिल पर गाँव-गाँव जाकर चूड़ी बेचता था। वो बंदा गुरुमुख था। सुलतानपुर में एक नामी के घर में रहता था। वो स्वभाव से बड़ा अच्छा