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निराले सद्गुरु

निराले सद्गुरु

Nirale Satguru

by साहिब बन्दगी

Source: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (origin)

DevanagariHindipublished112 pages

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100 साहिब बन्दगी

आदमी तो चाहता है कि पाप भी करे और भक्ति भी। आप कहते हैं कि अगर पाप कर रहे हो तो भक्ति कभी फलित नहीं हो सकती है। गुरु लोग ज़ोर देकर नहीं बोल रहे हैं। उनके शिष्य कुछ भी करें, उन्हें पता भी नहीं चलता है। आपको पता चल जाता है कि आपका फलाना शिष्य क्या कर रहा है। क्योंकि आप सबको करीब से जानते हैं, सबसे बात कर लेते हैं।

कोई दारू पीता है तो दूसरा आकर आपको ख़बर दे देता है कि फलाने ने दारू पी है। फिर आप उसे भगा देते हैं। इसलिए डर भी है। बाकी गुरुओं को पता नहीं चलता है कि उनका शिष्य क्या कर रहा है।

फिर आपके पास अपना कम्प्यूटर भी है। वो पर्दे (स्क्रीन) पर सब दिखाता है। इसलिए सब पता होता है आपको। आपको पूरी जानकारी रहती है।

जैसे फैक्टरियों में, स्कूलों में कैमरे हैं, 5-6 खण्डों में बंटे होते हैं। कहीं हर कमरे में कैमरा है। एक बटन दबाओ तो सारी पिक्चर सामने आ जाती है, सब दिखने लगता है। काम करने वालों को भी पता है कि एक कैमरा हमपर नज़र रखे है। इस तरह एक कैमरा है, जिससे आप सबको देखते रहते हैं। जो लोग आपको अपना दुखड़ा सुनाते हैं, आप वे सब भी सुनते हैं। जब आपके पास समय होता है, आप अपना अन्दर का मेसेज बॉक्स खोलकर देखते हैं और उनपर विचार करते हैं कि किसका क्या करना है। यदि किसी को ठीक करना है तो आप इच्छा कर लेते हैं, या किसी शक्ति को उसकी सुरक्षा के लिए भेज देते हैं।

बड़े जिम्मेदार हैं आप

जीवन के हर क्षेत्र में आप बड़े जिम्मेदार हैं। एक आदमी आपकी बटालियन का था; वो एक पागल को आपके पास लाया। आपने उसे कहा कि इसका ध्यान रखो। तब राँजड़ी में तीन दिन का भण्डारा था।