निराले सद्गुरु
Nirale Satguru
by साहिब बन्दगी
Source: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (origin)
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पेड़ नहीं होता है। नमक का पानी ज़मीन को ऊसर बना देता है। जब तूफान चले तो दो फर्लांग दूर तक लहरें पहुँचती हैं। वहाँ तक कोई घास तक नहीं होती है।
नमकीन पानी ने ज़मीन को ऊसर बना दिया। नमक खाने में स्वादिष्ट है, पर उसमें बड़े दोष हैं। राँज़ड़ी में दो अमरूद के पेड़ थे। उनपर इतने अमरूद आते थे कि इतने पत्ते भी नहीं होते थे। कुछ समय बाद दोनों पेड़ कुम्हला गये, रंग मटमैला हो गया, फल खारा हो गया। आपने लोगों से पूछा कि कैसे हुआ, पर किसी को जानकारी नहीं थी। बात यह थी कि कुल्फियाँ जमाते हैं तो उसमें बर्फ और नमक दोनों डालते हैं। बेचने के बाद लड़कों ने वो बचा हुआ पानी पेड़ों में फेंक दिया। दोनों दूषित हो गये। वो पेड़ आज भी हैं। बाद में आपने वो वाली मिट्टी निकलवाकर दूसरी नयी मिट्टी डलवायी। .... इस तरह भक्ति को दोष दूषित कर देते हैं। यदि दूषित हो जायेगी भक्ति तो फिर कोई फल नहीं देगी।
70 यात्री एक बार समुद्र में प्यासे मर गये। अचरज वाली बात है। पहले कुछ दिन पिया, पर उससे लीवर ख़राब हुआ। फिर बाद में पानी नहीं पी रहे थे, प्यासे रहे। समुद्र में एक जहाज़ में 70 आदमी प्यासे मरे।
वर्तमान में हम देख रहे हैं, लोग भक्ति करना चाह रहे हैं, पर पाबन्द नहीं रहना चाहते हैं, चारसौबीसी, छल-कपट, पाप सब करना चाहते हैं। जहाँ अधर्म है, वहाँ भक्ति नहीं पनपेगी। गुरु लोग भी पाप, छल-कपट छोड़ने को नहीं कह रहे हैं। वो जानते हैं कि ऐसे में कोई नहीं आयेगा। इसलिए बाकी पंथों में लोग दौड़कर पहुँचते हैं, पर आपके पास आसानी से नहीं आते हैं। पहले हज़ार बार सोचते हैं। सिद्धांत सुनने के बाद आदमी की चुटिया खड़ी हो जाती है। हालांकि वो अंदर से जानते हैं कि इनकी भक्ति अच्छी है।