निराले सद्गुरु
Nirale Satguru
by साहिब बन्दगी
Source: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (origin)
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निरंजन ने आद्या शक्ति को कहा जीव और बीज तुम्हारे पास है और तीनों पुत्र भी सौंपता हूं। मैं शून्य में निराकार रूप में समाऊंगा और मन बन कर सभी जीवों के साथ रहूंगा। मेरा भेद किसी को नहीं देना। मेरा कोई दर्शन नहीं कर सकेगा, चाहे खोजते खोजते जन्म गवादे। तुमने तीनों पुत्रों के साथ राज्य करना। जब यह बड़े होंगे तो समन्दर मन्थन के लिए भेजना।
यहाँ नोट करने वाली बात यह है कि काल निरंजन ने आद्या शक्ति को परमपुरुष का भेद छुपाने के लिए आपने साथ मिला लिया और भी देखे तो निरंजन ने आद्या शक्ति को चार खानि व 84 लाख जूनिया कैसे बनाना है इसका पूरा भेद बताकर शून्य में समा गया और कहा मैं मन रूप में हर जीव के साथ रहूँगा है ताकि कोई भी जीव परम पुरुष का भेद न जान पाये।
बच्चे बड़े हुए तो माता आद्या शक्ति ने तीनों पुत्रों को समुन्दर मन्थन के लिए भेजा। इतने में काल निरंजन ने तमाशा किया स्वांस द्वारा पवन में वेद उत्पन्न किये। निरंजन ने वायु में वेद के शब्द किए कोई पुस्तक नहीं लिखी थी। इस लिए वेद निराकार तक की बात कहता है। वेद उसका पूरा भेद नहीं बता रहा है। समुन्दर मन्थन के बाद ब्रह्मा को वेद, विष्णु को तेज और शिवजी को विष मिला। माता ने कहा जो जो तीनों को मिला है अपने पास रख लें।
कबीर साहिब धर्मदास को बता रहे हैं के अब आदि शक्ति ने पुनः तीनों पुत्रों को समुद्र मन्थन के लिए भेजा तो इतने में आद्या शक्ति ने तीन कन्याओं की उत्पत्ति कर समुद्र में समाने को कहा। जब समुद्र मन्थन हुआ तो तीनों को तीन कन्याएँ मिली। माता पास आए तो माता ने सावित्री ब्रह्मा जी को, लक्ष्मी विष्णु जी को और पार्वती शंकर जी को