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निराले सद्गुरु

निराले सद्गुरु

Nirale Satguru

by साहिब बन्दगी

Source: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (origin)

DevanagariHindipublished112 pages

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(iii)

विषय सूचीपृष्ठ संख्या
☞ कौन है काल पुरुष व परम पुरुष9
☞ प्रेम के अथाह सागर हैं आप15
☞ आत्मा आपकी तरफ आकर्षित होती है16
☞ सब महात्माओं से अलग हैं आप17
☞ आपकी किसी से स्पर्द्धा (competition) नहीं है21
☞ सभी डर रहे हैं आपसे22
☞ सेवा है आपका लक्ष्य27
☞ बचपन से ही परिश्रमी रहे आप31
☞ भूत भी भाग जायेगा31
☞ वो समय भी था............35
☞ एक ही धुन में रहते हैं आप35
☞ अंत में ऐसे साथ देते हैं आप37
☞ सबके दुख को समझते हैं आप38
☞ मच्छर तक को नहीं मारते हैं आप41
☞ आपके आगे मन का ज़ोर नहीं चलता है42
☞ प्रोफेसर बोला-आप साधारण नहीं हैं43
☞ गहरी सुरति देनी पड़ी आपको44
☞ ठीक चौबीस घण्टे बाद वो हिला45
☞ बहुत कोमल हृदय है आपका46
☞ आपकी वाणी बड़ी ही प्यारी है47
☞ आपकी आँखें भी सबसे निराली हैं47
☞ महात्मा लोग भी समझ रहे हैं आपको48
☞ साहिब कबीर धरती पर उतर आए है50
☞ इसलिए शरीर धारण करना पड़ता है परम पुरुष को51
☞ आपका नाम सबसे निराला है53