निराले सद्गुरु
Nirale Satguru
by साहिब बन्दगी
Source: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (origin)
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लगीं। जब वो गाय बूढ़ी हो गयी तो गर्भनी हुई। तब उसे बैठने में भी तक़लीफ़ होती थी। जब बैठती तो उठने में तक़लीफ़ होती थी। आपके कुछ लोगों ने कहा कि इसे बेच देते हैं। आपने कहा-नहीं, यह तो पाप है, धोखा है। अभी यह बूढ़ी है; हमारा धर्म तो इसकी सेवा करना है।
आप राँजड़ी में ज़्यादा पशु नहीं रखना चाहते हैं; जगह कम है, इसलिए वही रखते हैं, जो ज़्यादा दूध देते हैं। क्योंकि वहाँ रोज़ कोई 40 किलो दूध लगता है। बहुत लोग आते हैं; सबके लिए चाय बनाना; जो वहाँ रहते हैं, उनके लिए चाय। ...तो गाय ओखी हो गयी, परेशान हो गयी। एक ने कहा कि इसे रखबंधु में भेज देते हैं, दूध कम दे रही है, 3-4 किलो ही दे रही है। आपने कहा-नहीं। साल-भर आपने कहीं नहीं ले जाने दिया। एक दिन एक ने कहा कि यहाँ पक्का फर्श है, इसलिए यह दुखी है; इसे रखबंधु ले जाता हूँ; वहाँ कच्चा फर्श है, वहाँ यह आराम से रहेगी, ठीक हो जायेगी। आप उसकी बात में आ गये। वो उसे ले गया और उसे नया कर दिया। आप वहाँ गये तो वो हाँप रही थी। आप कहते हैं कि किसी भी पशु को परेशान करके दूध पिया तो यह ठीक नहीं है, किसी काम का नहीं है। आपने उसे डाँटा। उसने कहा कि गलती हो गयी। ....तो उस गाय ने बच्चा दिया और फिर 24 किलो दूध दिया।
आप कहते हैं कि जब गाय का बछड़ा मर जाए तो वो दूध नहीं देती है। फिर उसे इंजेक्शन लगाकर दूध नहीं लेना। कुछ तो भैंस के बछड़े के लिए पहले से ही खड्ढा खोदकर रखते हैं, पर आप इसे बहुत पाप मानते हैं, समझाते हैं कि ऐसा कभी न करना।
आपके पशु भी आपसे बहुत प्रेम करते हैं। आप उन्हें भी सुरति देते हैं। वे चेतन हैं सभी। जिस समय आप पहुँचते हैं तो वे जान जाते हैं कि आप आ गये। जिस दिन आप समय पर उन्हें खाना नहीं देते हैं तो वे नाराज़गी भी दिखाते हैं। वे आपको आवाज़ देकर बुलाते भी हैं कि अभी समय हो गया है, हमें खाना दो। तो आपने एक से कह रखा है कि