निराले सद्गुरु
Nirale Satguru
by साहिब बन्दगी
Source: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (origin)
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भी आ सकती है। तब किसी का भगवान नहीं बचाता है। कोई नहीं कहता है कि मेरे भगवान ने रक्षा नहीं की। पर साहिब-बंदगी वाला कोई बीमार हो गया तो कहते हैं कि देखते हैं कि कैसे बचाता है साहिब!
सच तो यह है कि आप तो अपने बंदों को मौत के मुँह से निकालकर भी बचा लेते हैं, पर उनका भगवान नहीं बचा पाता है। क्योंकि सद्गुरु की महिमा तो परमात्मा से भी बड़ी है।
तो उस माई ने कहा-साहिब जी! आप कृपा करना। आपने कहा कि चिंता मत कर, 24 घण्टे बाद यह होश में आयेगा। आप किसी को आशीर्वाद भी नहीं देते हैं। ठीक 24 घण्टे बाद वो हिला।
बहुत कोमल हृदय है आपका
स्वभाव की दृष्टि से देखा जाए तो आप जैसा स्वभाव किसी का मिल नहीं पायेगा। बाहर से आप भले ही कभी कठोर दिखें, पर भीतर से आप अत्यंत ही कोमल हृदय के हैं। शिष्यों के दोषों को निकालने के लिए आप बाहर से कुम्हार की तरह शब्द की चोट-पर-चोट करते हैं, पर ऐसे समय में भीतर से उसे अपनी सुरति का सहारा दे देते हैं। जैसे माँ बच्चे को डाँट तो देती है, मार भी देती है; पर मारने के बाद जब उसे पता चलता है कि गलती से ज़्यादा मार दिया है या बच्चा दुखी हो गया है तो उसे प्यार भी करती है। ऐसे ही आप भी करते हैं। आपको प्यार निभाना अच्छा आता है। आप जैसे कोई निभा नहीं सकता है। जिसकी आपसे नहीं निभ सकती, उसकी किसी और से निभ नहीं सकती है। क्योंकि आपके जैसे कोमल हृदय कोई होगा ही नहीं, क्योंकि आपके जैसा सबमें आत्मा को देखकर व्यवहार करने वाला कोई होगा ही नहीं।