निराले सद्गुरु
Nirale Satguru
साहिब बन्दगी द्वारा
स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंनिराले सद्गुरु | 45
नहीं देते, कहते हैं कि साहिब बंदगी में चली गयी है इसलिए यह हुआ। वो बंदा नामी नहीं था। पर स्त्री 24 साल से किसी और पंथ की नामी थी। बाद में साहिब जी से नाम लिया। आपने समझाया कि यह तो शरीर की बीमारी है; तू उनकी बात नहीं सुन। वो बोली कि बोल नहीं रहे हैं, कॉमा में चले गये हैं। यदि मर गये तो मैं आपके पास नहीं आ पाऊँगी। आप कह सकते थे कि मत आना। पर आप ऐसा नहीं कहते; आप सबके दुख को समझते हैं। आपने कहा कि घबराना मत, धीरे-धीरे होश में आयेगा। आपको तब मजबूरी में उसे गहरी सुरति देनी पड़ी। कुछ समय बाद वो होश में आ गया।
उसे आई.सी.यू. में रखा हुआ था। वो डॉ० लोग तो बुद्धू बनाकर वहाँ आक्सीज़न पर रख देते हैं, कहते हैं कि जिंदा है। मोटी रक़म जो लेनी है।
तो आपकी कृपा से वो धीरे-धीरे बिलकुल ठीक हो गया। ऐसे ही कइयों को आपने कॉमा से वापिस लाकर जीवन प्रदान किया। आप इन चीज़ों में ज़्यादा उलझना नहीं चाहते हैं, पर आपको लोग मजबूर कर देते हैं। आप अपना ध्यान सत्संग में लगाना चाहते हैं, दुनिया को समझाने में लगाना चाहते हैं। पर आपको लोग अपने स्वार्थों में खींच लेते हैं; आपका ध्यान वहाँ पर लगा देते हैं।
ठीक चौबीस घण्टे बाद वो हिला
एक बच्चे ने नींद की गोली खा ली। लोग ज़ालिम हैं, माँ को कहने लगे कि देखते हैं कि तेरे बेटे को साहिब अब कैसे बचाता है ! यदि अपना कोई मर जाए तो यह नहीं कहते हैं कि मेरे भगवान ने नहीं बचाया। ये घटनाएँ तो सबके साथ होती रहती हैं। लोग मरते रहते हैं, बीमार होते रहते हैं, घटनाएँ होती रहती हैं। इस नश्वर संसार में कोई अमर तो हो नहीं सकता है। शरीर है तो रोग भी आयेंगे और इसने नष्ट भी होना ही है और मौत का कोई भरोसा भी नहीं है, कभी