निराले सद्गुरु
Nirale Satguru
by साहिब बन्दगी
Source: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (origin)
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इस कारण सभी हंसों को एक साथ न लेकर युक्ति-युक्ति द्वारा उन्हें सतलोक ले जाने के लिए वह परम सत्ता जीवों को लेने आया करती है। इसी सत्ता को कबीर साहिब के रूप में भी आना पड़ा था। यह एक परम सत्य है। पर इस रहस्य को कोई बिरला ही समझ पाता है।
...तो आँखों में चूंकि आपका वास रहता है, इसलिए आँखें कोई नहीं बना सकता है। इसलिए बंदगी के समय भी आपसे आँखें ही मिलाई जाती हैं। इसलिए-
नज़र मिलाना आओ जब-जब, वो ही मिलन द्वारा है।
आँखों में ही बैठ यह साहिब, चुन-चुन हंसन तारा है॥
महात्मा लोग भी समझ रहे हैं आपको
आपकी वाणी की नक़ल भी हो चुकी है। बड़े-2 पंथों के महात्मा आपकी वाणी को तोड़-मरोड़कर कह रहे हैं। यदि उनके सन् 2000 से पहले वाले सत्संग सुनें जाएँ तो उनकी वाणी में, उनके विचारों में, उनकी फ़िलासफ़ी में बहुत अंतर मिल जायेगा। जबकि एक सच्चे महात्मा की वाणी कभी बदलती नहीं है। बदलेगी तो तभी जब उसमें कमी होगी, उसे अपनी वाणी पर संदेह होगा, आत्म-अनुभव नहीं होगा। जो आँखों देखी बात करता है, वो जो आज कहेगा, 50 साल बाद भी वही कहेगा। तो आपके ज्ञान, आपकी वाणी को सुनकर महात्मा लोगों को पता चलने लग गया है कि आप क्या चीज़ हैं। कुछ महात्मा आपसे नाम की दीक्षा भी चाहते हैं कुछ महात्मा आप से छुपके से दीक्षा ले चुके हैं और शिष्यों को भी दिलाना चाहते हैं ताकि वे खुद भी संसार-सागर से पार हो सकें और उनके शिष्य भी। यह बात कठिन ज़रूर लगेगी, पर परम-सत्य है। सबकी यह बात आप मंजूर नहीं करते हैं। इसका कारण आप ही जानते हैं।