निराले सद्गुरु
Nirale Satguru
by साहिब बन्दगी
Source: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (origin)
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पहुँचे राँजड़ी, कीने दर्शन आप,
मन ही मन प्रणाम कर, दीये आश्रम वार ॥
साहिब शब्द न काटिहौं, बोले संत अभिलाष ॥
साहिब कबीर धरती पर उतर आए हैं
दुनिया के अंदर बड़े-२ विद्वान हैं, पर आपकी यह विशेषता है कि जो भी कहते हैं, उसका असर पड़ता है। क्योंकि आप जो भी कहते हैं, पहले स्वयं अनुकरण करते हैं।
एक दिन एक ने आपसे फ़ोन पर कहा कि अध्यात्म की जितनी गहराई में आप बात करते हैं, कोई नहीं करता है। जो आप बातें कहते हैं, वो आपकी अपनी अनुभूति है या फिर वंचक ज्ञान है? आपने उससे कहा कि तुम्हारी अनुभूति क्या कह रही है? आपने कहा कि मैं जो भी बोल रहा हूँ, सब अनुभूतियाँ हैं।
इस तरह बड़े -२ प्रवक्ता हैं, कहते हैं, पर खुद नहीं करते हैं। मुम्बई में जब शांति-सम्मेलन हुआ था तो बड़े-२ धर्म प्रवक्ता इकट्ठा हुए थे। वो मामूली धर्म-सम्मेलन नहीं था। दलाईलामा जी, शंकराचार्य जी, और भी धर्मों के बड़े-२ सभी आए थे। सबने बोला। आपकी भी बारी आई। सब कागज़ पर लिखकर लाए थे कि क्या बोलना है। पर आप दिमाग़ से बोलते ही नहीं हैं, पढ़ी-लिखी बातें बोलते नहीं हैं। आप तो हृदय से बोलते हैं, और जो भी हृदय से बात होती है, उसका असर पड़ता है।
तो बड़े-२ बुद्धिजीवी बात कर रहे थे विश्वशांति की। कोई कुछ कह रहा था तो कोई कुछ। आपने अपनी बात कही। बाद में वहाँ के व्यवस्थापक जी ने अपने विचार रखे। उनसे रहा नहीं गया और उन्होंने कहा कि मधु परमहंस जी की बात सुनकर ऐसा लगा मानो कबीर धरती पर उतर आया है।