निराले सद्गुरु
Nirale Satguru
by साहिब बन्दगी
Source: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (origin)
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Read in context| 58 | साहिब बन्दगी |
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सब आपकी बातें सुनकर हैरान रह गये। वो तो पी.एच.डी थे, पर आपका तो विषय भी नहीं था वनस्पति शास्त्र। आपने उसी से संबंधित ही सवाल पूछे। वो नहीं बता पाए। आपने उन्हें समझाया। फिर वे सहमत हुए, कहा कि आप ठीक कह रहे हैं।
वाणी पर पूरा कण्ट्रोल रहता है आपका
आपका अपनी वाणी पर पूरा कण्ट्रोल रहता है। फिजूल नहीं बोलते हैं आप। आपने कभी किसी को आशीर्वाद नहीं दिया। किसी भी बेकार बात को नहीं बोलते हैं। कई लोग डोगरी में बड़ी बातें बोलते हैं, जो अन्य भाषा में गाली हो जाती है। इस तरह अन्य भाषाओं के कुछ शब्द यहाँ गाली बन जाते हैं। इसलिए शब्द सोच-विचार कर बोलना चाहिए। आपकी वाणी में कभी गाली नहीं निकलती है। आपकी हर बात सत्य होती है। आप सत्लोक में रहते हैं और सत्य की बात ही करते हैं।
आप दीन दुखियों के हैं
अगर देखा जाए तो दो तरह के लोग आपके पास आते हैं। 90 प्रतिशत तो बीमार, असहाय, परेशान लोग होते हैं, पर 10 प्रतिशत लोग होते हैं, जो शौकिया आते हैं।
10 साल पहले की बात है, एक महाजन ने आपको रामगढ़ में ज़मीन दी। जब आप बाद में वहाँ आश्रम बनवाने पहुँचे तो एक नामी लड़का आपके पास आया, कहा कि क्या कर रहे हैं गुरुजी? आपने कहा कि ज़मीन ख़रीदी है, आश्रम बनवा रहा हूँ। उसने कहा-गुरु जी, सब आपका ही है, कोई बात नहीं, पर जहाँ आप आश्रम बनवा रहे हैं, वो तो मेरी ज़मीन है; आपने किससे ज़मीन ख़रीदी है? आपने कहा कि फलाने महाजन ने ज़मीन दी थी। उसने कहा कि उसकी तो वहाँ छपड़ी में है। आपने महाजन से मिलकर कहा कि आपने बताई यह थी, पर है आपकी