निराले सद्गुरु
Nirale Satguru
by साहिब बन्दगी
Source: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (origin)
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जगह वहाँ छपड़ी में। महाजन ने कहा-महाराज! मैं कोई खेती-बाड़ी तो करता नहीं हूँ; लोगों ने मिट्टी निकाल-2 कर इसे खाली कर दिया है। आपने कहा कि यह ठीक नहीं है; वापिस लो। तो उसने कहा कि लिखा-पढ़ी करके दे दो। आपने सोचा कि पहले भी लिखा-पढ़ी करके ली थी, अब वापिस भी लिखा-पढ़ी करके देंगे तो पैसे लगेंगे, इसलिए आपने कहा रहने दो लिखा-पढ़ी को छपड़ी वाली को ही ठीक कर लेंगे। आपने अपने लोगों को कहा कि इसे भरते हैं; एक ट्रेक्टर आश्रम का देता हूँ, एक आप किसी सौखे नामी का ले लो और इसे भर दो। तो एक ने कहा कि यहाँ कोई सौखा नामी नहीं है। सब ऐसे ही हैं। उसने कहा कि जो सौखे-सौखे थे, उन्हें एक दूसरे पंथ वाले ले गये। किसी को कहा कि चल वहाँ, जत्थेदार बना देंगे, किसी को कहा कि फलाना बना देंगे। फिर गुरु जी, जो खाने-पीने वाले थे, वो एक दूसरे पंथ वाले ले गये, कहा कि जो मरजी खाओ-पीओ, मौज-मस्ती करो और भक्ति भी करो। फिर आपके लिए बचे ही लूले, लँगड़े, बीमार। अब आपका प्रचार भी यही कर रहे हैं; कोई पागल दिखता है तो कहते हैं कि चल राँजड़ी; फिर कोई भूत-प्रेत वाला दिखता है तो कहते हैं कि चल राँजड़ी। आपने कहा कि वो भी ठीक हैं।
बाकी देखते हैं कि अच्छे कपड़े पहने हुए हैं तो छाँटते जाते हैं; पैसे, रुतबे आदि को देखकर छाँटते हैं। आप सीधा आँखों में देखते हैं; आप श्रद्धा, प्रेम और रूहानियत को देखते हैं। वो अंदर की आस्था नहीं देख रहे हैं, बाहरी भेष-भूषा देख रहे हैं। वो यह देख रहे हैं कि हमें क्या दे सकता है! आप देखते हैं कि मुझसे क्या ले सकता है!
एक नामी अपने ससुराल गया तो वहाँ अपनी सास को समझाकर लाया। वो 60 साल से दूसरे पंथ में मशहूर थी; बड़ी ज्ञानी थी; कई लोगों को भी नाम दिलवाया था। जब वो आपसे नाम ले लिया तो नामी के एक दोस्त ने उनसे कहा कि आपने यह क्या किया, इतनी इज्जत थी आपकी