निराले सद्गुरु
Nirale Satguru
by साहिब बन्दगी
Source: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (origin)
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है। अपने भक्तों की प्रेम पुकार सुनकर आप अपने शब्द रूपी वाहन पर सवार होकर पल भर में उनके पास पहुँच जाते हैं और उसे अपनी तान या मीठा शब्द सुनाकर आनन्दमय कर लौट जाते हैं।
परमहंस की तरह रहते हैं आप
हंस बड़ा प्यारा पक्षी है। वो सुन्दर भी बहुत है। उसमें एक बड़ा प्यारा गुण है। वो दूध और पानी को अलग कर लेता है। यह काम कोई भी नहीं कर सकता है। ऐसे ही आप भी किसी से पक्षपात नहीं करते। चाहे वो आपका नामी हो या कोई और।
एक आदमी आपके पास आया, कहा-गुरु जी, मेरी पत्नी जबसे आपका नाम लेकर गयी है, तबसे घर में लड़ाई लग गयी है। आपने कारण पूछा तो कहा कि पिता जी शिवजी की भक्ति करते हैं। उसने घर आकर शिवजी की फोटो स्टोर में उलटी करके रख दी और आपकी फोटो लगा दी। जब पिता जी ने पूछा तो कहा कि अब यहाँ पर केवल साहिब की फोटो ही लगेगी। पिता जी ने कहा कि हम उनकी भक्ति करते हैं; वो भी रहने दो, साहिब की भी फोटो लगा दो। पर वो नहीं मानी, कहने लगी कि अब तो केवल साहिब की फोटो ही लगनी है। फिर पिता जी गालियाँ देने लगे। आपने कहा कि उनका कोई कसूर नहीं है। सारा कसूर ही माई का है। फोटो से क्या लेना है! फोटो दिल में रख लो, वही काफ़ी है।
जैसे एक माई आपके पास शिकायत लेकर आई कि बंदा आपकी फोटो नहीं लगाने देता है। आपने कहा कि रहने दो, मेरी फोटो को अपने दिल में लगा दो। वो कहने लगी कि पेटी में रखती हूँ तो वहाँ से भी निकाल लेता है। आपने कहा कि दिल की पेटी में रखो न, बाहरी पेटी में क्यों रख रही हो? फिर कहने लगी कि नाम-भजन भी नहीं करने देता।