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निराले सद्गुरु

निराले सद्गुरु

Nirale Satguru

by साहिब बन्दगी

Source: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (origin)

DevanagariHindipublished112 pages

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90 साहिब बन्दगी

लगा, सब कुछ झूमने लगा, सबको लगा मानो पूरा ब्रह्माण्ड झूम रहा हो। वैसे तो आप नाचते नहीं हैं, पर एक बार तब आप मौज में थे और आपके साथ पूरा ब्रह्माण्ड प्रसन्नचित्त होकर नाच रहा था। यह नज़ारा देखते ही बनता था। जो भी वहाँ मौजूद था, वो ही इस अद्भुत नज़ारे का आनन्द उठा रहा था।

बदमाशों को भी सिखाया प्रेम आपने

प्रेम के द्वारा आप बदमाशों को भी सीधे रास्ते पर ले आते हैं। आपका प्रेम पाकर उनमें से भी प्रेम प्रस्फुटित होने लगता है। वे अपना स्वभाव भूल जाते हैं और आपके प्रेम में रंगकर दयालु स्वभाव के हो जाते हैं।

गलबड्डे का मक्खू जब आपके पास नाम लेने आया तो उसी के गाँव के लोगों ने आपसे कहा कि इसे नाम नहीं देना; यह बहुत बड़ा बदमाश है; इसने बड़े क़त्ल भी किये हैं। यदि इसे नाम दिया तो कोई आपके पास नहीं आयेगा। आपने कहा-इसे तो पहले नाम देना है। क्योंकि आप तो जानते हैं कि ऐसे लोगों को कैसे सुधारना है। जब आपने उसे सुरति दी, प्रेम दिया तो वो आपके प्रेम में रँगकर निर्मल हो गया; उसकी सारी बदमाशी समाप्त हो गयी। गाँव वाले उसके बदले हुए निर्मल स्वभाव को देख इतने प्रसन्न हुए कि उन्होंने भी आपसे नाम ले लिया। उन्होंने मिलकर आपको धन्यवाद दिया कि आपने ऐसे बदमाश को सुधार दिया, जो कभी सुधरने वाला नहीं था। ऐसे ही सैकड़ों बदमाशों को आपने अपने प्रेम द्वारा नेक इंसान बना दिया।

वो भी करते हैं बंदगी

पशु-पक्षी, कीट-पतंगे, पेड़-पौधे सब आपको प्रणाम करते हैं। आपके कुल्ले में अनेक साँप रहते हैं। आप कभी उन्हें भगाने का प्रयास