निराले सद्गुरु
Nirale Satguru
by साहिब बन्दगी
Source: Sahib Bandgi Sant Ashram Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Distt. Samba (J & K) (origin)
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को धमकाया और जबरन उसका संस्कार करवाया, कहीं पिण्ड दान करवाया, कहीं कुछ। जब आपको पता चला तो आपने अपने लोग भेजे, कहा कि कार्यवाही करनी है, क्योंकि इन्होंने एक पार्थिव शरीर के साथ बदतमीजी की है। आपने माई को कहा कि यदि तू केस नहीं करेगी तो मैं तेरी लड़कियों की तरफ से दावा करूँगा।
आप कानून का सहारा लेते हैं। यदि पुलिस भी कार्यवाही नहीं करती है तो आप न्यायालय में अपील करते हैं। आप नागरिक अधिकारों को जानते हैं।
एक शास्त्री जी अपने सत्संग में आपके ख़िलाफ़ बोल रहे थे, बड़ी निंदा कर रहे थे। वहाँ आपका एक नामी भी बैठा था, उसने कहा कि ऐसा तो नहीं है। शास्त्री जी ने कहा कि इधर आ, तू उनका शिष्य है क्या? कहा-हाँ। वो उधर ही उसे मारना शुरू कर दिया। यह गुण्डापन नहीं था तो और क्या था ! फिर 50-60 बंदे भेजकर उसपर हमला किया। आपको पता चला तो आपने पुलिस से संपर्क किया, पर कोई कार्यवाही नहीं की पुलिस ने।
आप सब काम तरीके से करते हैं, कानून का सहारा लेकर करते हैं, पर जब कहीं से कोई कार्यवाही नहीं होती तो फिर आपका सोटा वो काम पूरा करता है। मोल्हू, पलाँवाला के लोग कारगिल की लड़ाई के बाद अपने घर नहीं जा सके। बाकी छः महीने में चले गये, पर जो हमले वाले थे, वे दो साल वहीं रहे। उनकी लड़कियाँ ख़राब हो गयीं, पशु मर गये। यह था आपका सोटा। पर कुछ मूर्खों को तब भी होश नहीं आई।
यह सब इसलिए हुआ कि आपके नामियों को भी उन लोगों ने मारा था, घरों में नहीं जाने दिया था, तब अपने भक्तों के कष्टों को देख आपके मुँह से निकला था कि चिंता मत करो, ये भी अपने घर नहीं जा पायेंगे।
10-11 साल पहले की बात है, राँजड़ी में एक लड़का था, वो आपका बड़ा विरोध करता था, यदि कोई ग़रीब नामी होता तो उसका