नीतिवाक्यामृतम् (आचार्य सोमदेव सूरि - पण्डित रामचन्द्र मालवीय सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)
Nitivakyamritam of Somadeva Suri with Commentary
by आचार्य सोमदेव सूरि (टीकाकार: पं. रामचन्द्र मालवीय)
Page 91 of 220
Read in contextचारसमुद्देशः ७५ 'में कुशल है ? अर्थात् धनी के पास रात का पहरेदार न हो और राजा के पास गुप्तचर न हो तो दोनों की कुशल नहीं है। गुप्तचरों के भेद और उनके पृथक् पृथक् लक्षण— कार्पटिकोदास्थितिक·गृहपतिक·वैदेहक·तापस·कितव·किरात·यमपट्टि- काहितुण्डिक·शौण्डिक·शौभिक·पाटच्चर·विट·विदूषक·पीठमर्दक·नट·नर्तक- गायक·वादक·वाग्जीवक·गणक·शाकुनिक·भिषगैन्द्रजालिक·नैमित्तिक·सूदा- रालिक·संवाहिक·तीक्ष्ण·क्रूर·रसद्·जड·मूक·बधिरान्धच्छद्मनावस्थायियायि- भेदेनावसर्पवर्गः ॥ ८ ॥ कार्पटिक (छात्रवेष में गुप्तचर) उदास्थित (अध्यापक वेष में गुप्तचर) पटवारी, महाजन, तपस्वी, जुआ खेलने वाला, किरात, घर-घर घूमकर यमलोक यातना आदि के चित्र दिखाने वाला; मदारी, कलवार, बहुरूपिया, चोर अथवा बन्दी का वेष रखनेवाला, व्यसनी पुरुषों का संदेशादि वाहक, विदूषक, कामशास्त्री, नट, नर्तक, गायक, वादक, कथावाचक, ज्योतिषी, सगुनिया, वैद्य, जादूगर, नैमित्तिक, रसोईदार, विचित्र-विचित्र भोजन बनाने वाला, मालिश करने वाला, तीखे, रूखे, आलसी, जड़, गूंगे, बहिरे अन्धे आदि के कपट वेष में स्थायी और चर भेद से उक्त प्रकार के गुप्तचर होते हैं। परमर्मज्ञः प्रगल्भश्छात्रः कार्पटिकः ॥ ९ ॥ शत्रु के गूढ रहस्य को जाननेवाला धृष्ट छात्र 'कार्पटिक' है। यं कंचन समयमास्थाय प्रतिपन्नाचार्याभिषेकः प्रभूतान्तेवासी प्रज्ञातिशययुक्तो राजपरिकल्पितवृत्तिरुदास्थितः ॥ १० ॥ इच्छानुसार किसी भी सम्प्रदाय का आश्रय लेकर आचार्य पद पर प्रतिष्ठित होकर बहुत से शिष्यों को पढ़ाने वाला तथा तीक्ष्ण बुद्धि सम्पन्न और राजा के द्वारा निश्चित जीविकावाला व्यक्ति 'उदास्थित' है। गृहपतिवैदेहिकौ ग्रामकूटश्रेष्ठिनौ ॥ ११ ॥ गांव के मुखिया (पटवारी) और सूद पर रुपया बाँटने वाले गांव के महाजन 'गृहपति' और 'वैदेहिक' हैं। बाह्यव्रतविद्याभ्यां लोकदंभहेतुस्तापसः ॥ १२ ॥ दिखावटी व्रत और विद्या के नाम पर लोगों को ठगनेवाला 'तापस' संज्ञक गुप्तचर है। कितवो द्यूतकारः ॥ १३ ॥ जुआ खेलाने वाले का नाम कितव है। अल्पाखिलशरीरावयवः किरातः ॥ १४ ॥