नीतिवाक्यामृतम् (आचार्य सोमदेव सूरि - पण्डित रामचन्द्र मालवीय सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)
Nitivakyamritam of Somadeva Suri with Commentary
by आचार्य सोमदेव सूरि (टीकाकार: पं. रामचन्द्र मालवीय)
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Read in contextव्यसनों से उसका मोह दूर कर सकें वे योग पुरुष हैं।
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Line 9: उन व्यसनों से उसका मोह दूर कर सकें वे योग पुरुष हैं।
आहार्य व्यसन को दूर करने के उपाय- शिष्ट-संसर्गदुर्जनासंसर्गाभ्यां पुरातनमहापुरुषचरितोत्थिताभिश्च कथाभिराहार्यं व्यसनं प्रतिबध्नीयात् ॥ ५ ॥ पुरुष अपने आहार्य व्यसनों को सत्पुरुषों की संगति करके और दुष्ट पुरुषों का संसर्ग त्यागकर तथा प्राचीन महापुरुषों के चरित्र से सम्बद्ध कथाओं से दूर करे ।
अठारह प्रकार के दुर्व्यसनों का क्रमशः उल्लेख और उनके दोष आदि
का चर्चा-
Wait, is it का चर्चा- or की चर्चा-?
Line 17: का चर्चा— (Wait, looks like का चर्चा— with 'क' and 'ा' - yes, का चर्चा—).
स्त्रियमतिभजमाने भवत्यवश्यं तृतीया प्रकृतिः ॥ ६ ॥ स्त्री का अत्यधिक सेवन करने से मनुष्य अवश्य ही नपुंसक हो जाता है। सौम्यधातुक्षय