BharatKosha
पञ्चदशी (हिन्दी व्याख्या सहित)

पञ्चदशी (हिन्दी व्याख्या सहित)

Panchadashi by Swami Vidyaranya

by स्वामी विद्यारण्य

Source: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन · 1940 (origin)

DevanagariSanskritpublished726 pages

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नामरूपात्मक है 'ब्रह्मैवेदं सर्वं सच्चिदानन्दमात्रम्' इत्यादि उत्तर- तापनीय उपनिषद् में ब्रह्म को सच्चिदानन्दस्वरूप बताया है। सद्रूपमारुणिः प्राह, प्रज्ञानं ब्रह्म बह्वृचः । सनत्कुमार आनन्दमेवमन्यत्र गम्यताम् ॥६३॥ अरुण के पुत्र उद्दालक मुनि ने सदेव सोम्येदमग्र आसीत् इत्यादि छान्दोग्य श्रुति में ब्रह्म के सद्रूप का वर्णन किया है। बह्वृच शाखा वालों ने ऐतरेय उपनिषत् में 'प्रज्ञा प्रतिष्ठा प्रज्ञानं ब्रह्म (ऐत० ५-१) इत्यादि में ब्रह्म को ज्ञानरूप कहा है। छान्दोग्य श्रुति में सनत्कुमार ने नारद के प्रति 'यो वै भूमा तत्सुखम्' (छा०७- २३) इत्यादि वाक्यों के द्वारा ब्रह्म को आनन्दरूप बताया है। इसी प्रकार अन्यत्र भी समझलो । [तैत्तिरीय आदि श्रुतियों में भी 'आनन्दो ब्रह्मेति व्यजानात्' (तै० ६-६) इत्यादि वाक्यों के द्वारा ब्रह्म के इन तीनों स्वरूपों का जहां तहां वर्णन आता है]। विचिन्त्य सर्वरूपाणि कृत्वा नामानि तिष्ठति । अहं व्याकरवाणीमे नामरूपे इति श्रुतेः ॥६४॥ सर्वाणि रूपाणि विचिन्त्य धीरो नामानि कृत्वाभिवदन् यदास्ते तथा अनेन जीवेनात्मनानुप्रविश्य नामरूपे व्याकरवाणि (छा०६-३-२) इन श्रुतियों में जगत् के स्रष्टव्य नामरूपों को भी दिखाया गया है [ सच्चिदानन्द तत्व के होने में जैसे श्रुति प्रमाण है वैसे ही नाम और रूप की बताने वाली भी श्रुतियें हैं यही इस श्लोक का भाव है ] अव्याकृतं पुरा सृष्टेरूर्ध्वं व्याक्रियते द्विधा । अचिन्त्यशक्तिर्मायैषा ब्रह्मण्यव्याकृताभिधा ॥६५॥ तद्धेदं तर्ह्यव्याकृत मासीत्तन्नामरूपाभ्यामेव व्यक्रियतौसौनामायमिदं

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