BharatKosha
प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - प्रतिमा-दर्शन एवं सम्पूर्ण ७ अङ्क सान्वय सटीक)

प्रतिमानाटकम् (महाकवि भास - प्रतिमा-दर्शन एवं सम्पूर्ण ७ अङ्क सान्वय सटीक)

Pratimanatakam of Mahakavi Bhasa with Commentary

by महाकवि भास

DevanagariHindipublished178 pages

Page 21 of 178

Read in context
Page 21

( 18 ) तीसरा अंक—भरत ननिहाल से लौटते हैं । अयोध्या के बाहर प्रतिमा गृह मे मृत महाराज दशरथ की प्रतिमा स्थापित की जाती है । यह इक्ष्वाकु वंश के अन्य राजाओ की मूर्तियां भी हैं । भरत जब यहां आते हैं, तो उन्हें अयोध्या के बाहर कुछ समय रुक कर ही शुभ मुहूर्त मे अन्दर आने को कहा जाता है । वे इस प्रतिमा गृह को कोई मन्दिर समझ कर देव दर्शनार्थ अन्दर जाते हैं और पुजारी से उन मूर्तियों के बारे में पूछते हैं । उनको दिलीप, रघु और अज की मूर्तियों का परिचय दिया जाता है । इनसे यह भी कहा जाता है कि यह इक्ष्वाकु वंश के राजाओं का स्मारक गृह है । दशरथ की प्रतिमा को देख कर वे बेहोश हो जाते हैं । स्वस्थ होने पर देवकुलिक (उन्हें) पूरी बात बताता है । उसी बीच रानियां भी वहां आती हैं । भरत कैकेयी को बुरा-भला कहते हैं एवं सुमन्त्र को साथ लेकर राम को वन से लौटाने हेतु प्रस्थान करते हैं । चौथा अंक दण्डकारण्य मे भरत पहुंचते हैं और राम, लक्ष्मण व सीता—तीनों का अभिवादन करते हैं । भरत कैकेयी की निन्दा करते हुए राम से आग्रह करते हैं कि वे अयोध्या चलें और राज्य ग्रहण करें । राम कहते हैं कि मै पिताजी के कहे हुए वचनो को पूरा करके उन्हें 'सत्य प्रतिज्ञ' बनाऊँगा । जब भरत भी वन मे राम के ही साथ रहने का निश्चय प्रकट करते हैं, तो राम उनको शपथ देकर अयोध्या लौटाते हैं । भरत दो शर्तों के साथ वापस लौटते हैं—(1) 14 वर्ष की अवधि के समाप्त होने के बाद राम अयोध्या के राज्य को पुनः ग्रहण करेंगे, तथा (2) तब तक के लिए वे राम की चरण पादुकाएं लेकर अयोध्या जायेंगे व उन्हें सिंहासन पर रख कर प्रजा पालन करेंगे । पाँचवाँ अंक—राम अपने पिता दशरथ का वार्षिक श्राद्ध करने को चिन्तातुर हैं । इसी बीच बाहर से किसी अतिथि की ध्वनि आती है । वहाँ सन्यासी के कपट वेश मे रावण उपस्थित था, जो अपने भाई खर और दूषण की मृत्यु का बदला लेने राम के पास आया है । राम इस परिव्राजक (सन्यासी) का सम्मान करते हैं । बातों ही बातों में रावण बताता है कि राम को सुवर्ण मृग से पिण्डदान करना चाहिए । अचानक वही एक ऐसा हिरण दीखता है, जिसे लाने राम चले जाते हैं । लक्ष्मण उस समय अनुप-