पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary
by महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह
Page 18 of 470
Read in context१६ सूचीपत्र । पृष्ठ ७५ दोनों सेनाओं का सामना होना और निशान बज उठना ॥... ... ... ४१८ ७६ हुसेन और तातार खां की सेनाओं की लड़ाई होना अंत को तातार खां की फौज का भागना ॥ ... ,, ७७ खुरासान खां का आगे बढ़कर लड़ना ॥ ... ... ... ४१४ ७८ खुरासान खां की फौज का भागकर सुलतान की फ़ौज के साथ मिलना और कैमास का चढ़ाई करना ४१५ ७६ बाई ओर से जमान, दाहिनी ओर से कैमास और सामने से पृथ्वीराज का चढ़ना ॥ ... ,, ८० युद्ध का वर्णन ॥ ... ... ... ... , ८१ पृथ्वीराज की सेना का बढ़ना और मण्डलीक का मारा जाना ॥ ... ... ४१७ ८२ शहाबुद्दीन की सेना का भड़कना और पृथ्वीराज की सेना का पीछा करना ॥ ... ४१८ ८३ घोर युद्ध का वर्णन ॥ ... ... ... ... ,, ८४ पृथ्वीराज के सामन्तों का शहाबुद्दीन का पीछा करना ॥ ... ... ४१६ ८५ सुलतान का पकड़ा जाना, उसकी सेना का भागना और पृथ्वीराज की विजय ॥ ... ४२० ८६ सूर्योदय से एक घड़ी पांच पल पर लड़ाई श्रारम्भ हुई और चार घड़ी दिन रहे सुलतान पकड़ा गया, बीस हज़ार मीर और सात हज़ार हाथी घोड़े मारे गए, हिन्दू तेरह सौ मरे, तीन कोस में लड़ाई हुई, सुलतान को अपने डेरे में लाए ॥ ... ... ,, ८७ रणक्षेत्र में ढूंढकर पृथ्वीराज का मीर हुसेन की लाश निकलवाना ॥ ... ... ४२१ ८८ पातुरि का जीते जी हुसेन के क़ब्र में गड़ जाना ॥ ... ... ,, ८६ पृथ्वीराज का शहाबुद्दीन को पांच दिन आदर के साथ रख कर, तीन शेर सलाम कराके मीर हुसेन के बेटे ग़ाज़ी को उसको सौंप कर यह प्रण कराके कि अब हिन्दुओं पर न चढूंगा, छोड़ना. शाह का ग़ाज़ी को लेकर कुशल से गज़नी पहुंचना ॥ ... ... ,, ६० अमीरों का सुलतान के जीते जागते लौटने पर बधाई देना और कुशल पूछना ॥ ... ४२२ ६१ उपसंहारणी टिप्पण ॥ ... ... ... ... ४२३. (१०) आखेटक चूक वर्णन । (पृष्ठ ४२५ से ४३८ तक ) १ एक वर्ष बीत गया, परन्तु शहाबुद्दीन के हृदय में पृथ्वीराज का वैर सालता रहा ॥ ... ४२५ २ एक महीना पांच दिन गजनी में रह कर फिर हुसैन का पृथ्वीराज के पास आप आना ॥ ... ,, ३ फिर पृथ्वीराज का आखेटक माड़ना और शहाबुद्दीन का चूक करने को आना ॥ ... ,, ४ नीतिराव क्षत्रिय का शहाबुद्दीन को पृथ्वीराज के आखेट का समाचार देना ॥ ... ४२६ ५ आखेट का अच्छा अवसर पाकर शहाबुद्दीन का भेद लेने को दूत भेजना, दूत का समाचार देना, शाह का सरदारों को आज्ञा देना कि छिप कर पृथ्वीराज पर चढ़ाई करो ॥ ... ... ,, ६ हाजी खां आदि का तयारी करना ॥ ... ... ... ४२७ ७ शहाबुद्दीन का आज्ञा देना कि इस बात का भेद लो कि कितनी सेना चौहान के साथ है क्योंकि बिना भेद कुछ काम नहीं बनता ॥ ... ... ... ,, ८ सब सरदारों का मत होना कि बिना धोखा दिये चौहानो को जीतना कठिन है ॥ ... ,, ६ पृथ्वीराज कां वेशटंक आनन्द से आखेट खेलना ॥ ... ... ४२८ १० पृथ्वीराज के आखेट का वर्णन ॥ ... ... ... ,, ११ आठ हजार सेना और सरदारों के साथ शहाबुद्दीन का दट्टूवन में छिप कर पहुंचना ॥ ४२६ १२ सबेरे के समय चढ़ाई करने का विचार करना ॥ ... ... ,, १३ पांच सरदारों जो साथ लेकर आखेट को पृथ्वीराज का निकलना ॥ ... ४३० १४ कवि चन्द का कहना कि हमें शहाबुद्दीन के आने का सन्देह है और खोज करने पर चारों ओर यवनो को पाना ॥... ... ... ... ,, १५ शाह की ओर से आक्रमण प्रारम्भ होना ॥ ... ... ... ३१