पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary
by महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह
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Read in context4729 सूचीपत्र । ( १ ) आदि पर्व्व । ( पृष्ठ १ से १८० तक ) पृष्ठ । आदिदेव, गुरु, वाणी, लक्ष्मीश, सुरनाथ और सर्वेश का मंगलाचरण ॥ ... ... १ धर्म्म-स्तुति ॥ ... ... ... ... ... ८ कर्म्म-स्तुति ॥ ... ... ... ... ... ६ मुक्ति-स्तुति ॥ ... ... ... ... ... १० पूर्व कवियों की स्तुति और उच्छिष्ट संज्ञा कथन ॥ ... ... ... ” चंद की स्त्री अपने पति के उच्छिष्ट संज्ञा कथन में शंका करती है ॥ ... ... १२ चंद अपनी स्त्री की शंका का समाधान करता है ॥ ... ... ... १३ चंद की स्त्री पुनश्च शंका करती है ॥ ... ... ... ... ” चंद अपनी स्त्री कि शंका का पुनश्च समाधान करता है ॥ ... ... १४ चंद अपनी स्त्री के आगे ईश्वर के ऐश्वर्य का वर्णन करता है ॥ ... ... ” चंद की स्त्री अपने पति से अष्टादश पुराणों की अनुक्रमणिका पूछती है ॥ ... ... १६ चंद अष्टादश पुराणों की अनुक्रमणिका का कथन करता है ॥ ... ... ... ” चंद अपनी लघुता वर्णन करता है ॥ ... ... ... ... १७ $\left.{l}चंद उत्तापित होकर अपने को पूर्व-कवियों का दास होना उन की उक्ति को कहना और अपनी को बकना कहता है ॥\right}$ १८ चंद खलों का स्वभाव वर्णन करके सुजनों के निमित्त अपना काव्य रचन करना कहता है ॥ ... ” सरस्वती की स्तुति ॥ ... ... ... ... ... ” गणेश की स्तुति ॥ ... ... ... ... ... ” गणपति की उत्पत्ति की कथा ॥ ... ... ... ... २० शंकर की स्तुति ॥ ... ... ... ... ... २१ कवि की आशा का स्वरूप वर्णन ॥ ... ... ... ... २२ चंद का काव्य समुद्र कैसा है ॥ ... ... ... ... ... ” कोई अशुद्ध पढ़नेवाला चंद को काव्य-संबन्धी-दोष न दे ॥ ... ... २३ इस ग्रंथ में चंद ने क्या क्या कथन किया है ॥ ... ... ... ” रासो को रसिया सरस उच्चारै ॥ ... ... ... ... ” रासो का तत्त्वज्ञान कैसे होगा ॥ ... ... ... ... २४ जो रासो को सुगुरु से पढ़ता है वह कुमति नहीं दरसाता ॥ ... ... ... ” रासो किस को अच्छा और किस को बुरा प्रतीत होता है ॥ ... ... २५ इस ग्रंथ के काव्य की संख्या का कथन ॥ ... ... ... ” रासो के ढँके हुए अर्थ के विषय में कवि का कथन ॥ ... ... ... ” इस ग्रंथ के विषयों का संक्षेप कथन ॥ ... ... ... ” राजा परीक्षित की तक्षक दंशन और जन्मेजय की सर्पसत्र कथा ॥ ... ... २६ उस तक्षक का आबू पर अपना अर्बुद नाम धर रहना ॥ ... ... ३३ गालव ऋषि के शिष्य उत्तङ्क का उपाख्यान ॥ ... ... ... ” वशिष्ठ ऋषि का आबू पर तप करना और उनकी नंदनी गौ का अथाह बिल में गिरना .. ३४