भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

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पृष्ठ 5

सूचीपत्र । ३ पृष्ठ । ७४ सारंगदेवजी की रानी गोरीजी का अनल गर्भ सहित रणथंभ पधारना ... ... ६० ७५ आना राजा का जन्म होना और उनका बालपन ॥ ... ... ६१ ७६ आना का बालपन व्यतीत होना और वीरत्व को प्राप्त हो माता से पूछना ॥ ... ६२ ७७ आना की माता का उनको सर तर और अक्षर विद्या का उपदेश करना ॥ .. ... " ७८ आना का माता से पूछना कि मैं किस वंश में उत्पन्न हुथा हूं ॥ ... ... " ७९ गोरी माता का कहना कि यह बात न पूछो उसके कहते मुझे भय और करुणा होती है ... " ८० आना का माता से अपने वंश की कथा हठ करके पूछना ॥ ... ... ६३ ८१ आना की माता का उसे कथा प्रगट न करने को कहना और ढँक करके संक्षेप में कहना ॥ ... " ८२ अन्य उपनत्यों के द्वारा आना का संभरी को पूर्व कथा संभारना ॥ ... ... ६४ ८३ आना का माता से पूछना कि नर अर्थात् वीसलदेव दानव केन हुआ ॥ ... ... " ८४ आना की मा का कहना कि दानव की कथा न सुन चित भंग होगा ॥ ... ... ६५ ८५ आना का उत्तर दे कहना कि ऐसे मुझे क्यों डराती हो ॥ ... ... " ८६ आना की मा का कहना कि जिससे कार्य सिद्ध न हो उसका कहना व्यर्थ है ॥ ... " ८७ आना का प्रत्युत्तर देना कि आगे कितने नर, ऋषि और राज दानव हुए हैं कथा सुनने से क्या होता है ॥ ६६ ८८ आना की माता का वीसलदेवजी की सविस्तर कथा कहना और वीसलदेवजी का जन्म होना ॥ ... " ८६ वीसलदेवजी का पाट बैठना ॥ ... ... ... ... " ९० वीमलदेवजी का अंत समय पट्टन विजय करने को छत्र धारणा करना ... ... ६६ ९१ वीसलदेवजी पाट बैठकर केने राज करते थे ॥ ... ... ... ७० ९२ वीसलदेवजी का अपने पुत्र सारंगदेवजी को उपदेश करके सांभर भेजना कि जो अपनी धा-बेन के
पति के विनाश से दुखित हो गए थे ॥ ... ... ... } " ९३ वीसलदेवजी का मगया से बकुरना एक तालाब बनाने की आज्ञा देना और दरबार करना ॥ ७३ ९४ वीसलदेवजी का रखवास में पधारकर विश्राम करना और उन की एक अप्रिय रानी का उन को
नपुंसक करना ॥ ... ... ... ... ... } ७४ ९५ वीसलदेवजी का पुरुषत्व नाश होने से दुखित हो गोकर्णेश्वर की यात्रा करने को गुजरात में जाना ॥ ७५ ९६ वीमलदेवजी का गोकर्णेश्वर महादेव की स्तुति करना ॥ ... ... ... ७७ ९७ वोसलदेवजी से गोकर्णेश्वर के सिद्ध का उनका नाम ग्रामादि पूछना ॥ ... ... ७६ ९८ वीसलदेवजी का नाम ग्राम आदि बताना ॥ ... ... ... " ९६ सिद्ध का गोकर्णेश्वर के तीर्थ की महिमा वर्णन करना ॥ ... ... " १०० वीसलदेवजी का तीन दिन निराहार उपवास कर घोटानादि करना और महादेव का अपछरा को
उन्हें उठाने भेजना ॥ ... ... ... ... } ८० १०१ अपछरा का वीमलदेवजी को महादेव के प्रसन्न होने और मन की कामना पूर्ण होने का कहना ॥ " १०२ वीसलदेवजी का अपने को पूर्ण पुरुषत्व प्राप्त होना देखकर वहां वीसलपुर बसाय महादेव का
देवल बनने का हुकुम देना ॥ ... ... ... ... } ८१ १०३ वीसलदेवजी का पीछे अजमेर आना और सब कथा प्रसंग पवांरजी राणो से कहना ॥ ... ८३ १०४ सब काम-लुब्धों को शोच होना कि शंभु ने ऐसा क्या वर दिया ॥ ... ... " १०५ वीसलदेवजी का कामान्ध हो अकर्तव्य कर्म करना ॥ ... ... ... " १०६ वीसलदेवजी के दुराचरणों से दुःखी होकर नगर के लोगों का प्रधान के पास पुकारने जाना ॥ ८४ १०७ सब का आपस में सलाह करके वीसलदेवजी को राजधर्म अरज करना ... ... ८५ १०८ वीसलदेवजी ने उत्तर दे कहा कि यह सब मैं जानता हूं पर काम ज्वाला के बढ़ने से मैं लाचार हूं
अब तुम जो कहोगे वह करूंगा ॥ ... ... ... } " १०६ इस पर वीसलदेवजी का किरपाल को बुलाना और उस का आना ॥ ... ... " ११० वीसलदेवजी का किरपाल को कहना कि तरवारि की पूछो है सो हम नव खंड की पढ़ग
खोसने को पढ़ग बांधते हैं तुम खजाना संग ले बीसल सरवर पर डेरा करो ॥ ... } ८६