भारतकोश
पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

पृष्ठ 6, कुल 470 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 6

४ सूचीपत्र । १११ बीसल सरवर पर बीसलदेवजी के आधीन तथा ... ... ... त्र के दिग्विजयार्थ ... श्रटन के लिये एकत्र होना और गुजरात चालु ... ... ना अतएव बीसलदेव का उस पर चढ़ाई करना और वालुकाराय का विजेपालजी को और करने को आना ॥ ११२ चालुक राव का आना सुनकर बीसलदेवजी का ... ... ... ११३ बीसलदेवजी की खबर सुन वालुक राय का जला २ उठ्ना ॥ ... ... ११४ चालुका राव का नित्य नेम करके लड़ने को तयार प्रतिदिन बढ़ना ॥ ... ... ११५ वालुका राव का बीसलदेवजी के पास श्रीकंठ भट्ट को भेजना लड़हा कहना ॥ ११६ यह सुनते ही बीसलदेवजी का लड़ने को आज्ञा देना ॥ ... ... ११७ बीसलदेवजी का चक्रव्यूह और बालुकाराय का अहिब्यूह रचना ॥ ... ... ११८ बीसलदेवजी और चालुकाराय की फौजों का परस्पर युद्ध करना ॥ ... ... ११९ चालुक का कहना कि रात में युद्ध नहीं करना प्रात भये युद्ध करेंगे ॥ ... १२० दोनों योद्धाओं का अपने २ डेरों पर आना और चालुक के मंत्रियों का एक झूठी पत्री बना १२१ चालुक के मंत्रियों का उसे एक झूठी पत्री देकर घर भेज देना ॥ ... १२२ चालुक के मंत्रियों का बीसलदेवजी के मंत्रियों से मिल संधि कर लेना ॥ ... १२३ पावासुर का बीसलदेवजी को संधिपत्र लेने के समाचार कहना ॥ ... १२४ बीसलदेवजी का संधि स्वीकार कर वहां महल बनाने और नगर बसाने को कहना ॥ १२५ माल मँगा कर बीसलपुर बसाना और वहां से पीछे फिरना ॥ ... १२६ एक दूती का बीसलदेवजी को एक बहुत सुन्दर बनिकसुता की खबर देना ॥ १२७ बीसलदेवजी का बीसलपुर में प्रविष्ट होना ॥ ... ... १२८ बीसलदेवजी का पीछे अजमेर आना और वहां उनका वास होना ॥ ... ... १२६ बनिकसुता गौरो का पुष्कर में तप करना और बीसलदेवजी का उस पर मोहित होना ॥ १३० पुष्कर की तपस्विनी की बीसलदेवजी के प्रति श्रद्धासि ॥ ... ... १३१ बीसलदेवजी का पुष्कर में बनिकसुता गौरी का सतीत्व भ्रष्ट करना और उसका उन को दा होने का शाप देना ॥ ... ... ... १३२ गौरी का बीसलदेवजी को भयभीत देखकर कहना कि तुम्हारा पोता तुम्हारी सुकीर्त्ति करे १३३ तपस्विनी के कोप से बीसलदेवजी का सांप के काटने से अलोप होना ॥ ... १३४ जिस तपस्विनी के शाप से बीसलदेवजी असुर हुए उस के तप का आना की मा सविस्तर वर्णन १३५ शाप से विमुक्त होने के विचार से बीसलदेवजी का गोकर्ण की यात्रा के लिये बीसल सरवर प्रस्थान करना ॥ ... ... ... १३६ तपस्विनी के शाप से बीसलदेवजी की बुद्धि का चल विचल होना ॥ ... १३७ बीसलदेवजी को सांप का काटना और उस से उन का मरना ॥ ... ... १३८ बीसलदेवजी के मरणा और असुर हो नर भक्षण करने की बात सुनकर सारंगदेवजी का अपन को रणार्थंभ भेजना और आप उनसे युद्ध करने को तयार होना ॥ ... ... १३६ सारंगदेवजी की राणी गवरी का चिंता करना ॥ ... ... ... १४० सारंगदेवजी का सेना लेकर ढूंढो राक्षस से युद्ध करने को अजमेर पहुंचना ॥ ... १४१ सारंगदेवजी का तीन दिन कोट में रहना, वहां असुर का न मिलना अजमेर को भ्रष्ट और भय दशा देखकर चिंता करना ॥ ... ... ... १४२ सारंगदेवजी और उनके पिता ढूंढो दानव का परस्पर युद्ध होकर सारंगदेवजी का मारा जाना ॥ १०३ १४३ आना की मा का उसे कहना कि मनुष्यों को ढूंढ २ कर खाने से ढूंढा नाम पड़ा और उसने रम्य } १०४ अजमेर को बेराम कर दिया ॥ ... ... १४४ आना का माता से कहना कि अभी जाकर मैं उसे मार आऊं ॥ ... ... " १४५ गवरी का आना को आमंत्रन मंत कहकर शिखा करना ॥ ... ... " १४६ आना का माता से कहना कि या तो मैं सिर समपूंगा या छत्र धारूंगा ॥ ... १०५ १४७ आना का माता से कहना कि सेवा ऐसी है कि जिस से सब कार्य सिद्धी होती है ॥ ... " १४८ आना की माता का तो उसे शत्रु न देखने को कहना किन्तु उस का अजमेर जाना ॥ ... १०६