राजयोग (स्वामी विवेकानन्द - पातञ्जल योगसूत्र भाष्य सहित)
Raja Yoga - Swami Vivekananda with Patanjali Yoga Sutras
by स्वामी विवेकानन्द / महर्षि पतञ्जलि
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हो जायगा। योगाभ्यास करने पर जो चिह्न योगियों में प्रकट होते हैं, देह की स्वस्थता उनमे प्रथम है। स्वर भी मधुर हो जायगा, स्वर मे जो कुछ दोष है, सब निकल जायगा। और भी अनेक प्रकार के चिह्न प्रकट होगे, पर ये ही प्रथम है। जो बहुत अधिक साधना करते हैं, उनमे और भी दूसरे लक्षण प्रकट होते हैं। कभी-कभी घंटा-ध्वनि की तरह का शब्द सुन पडेगा, मानो दूर में बहुत से घंटे बज रहे हैं और वे सारे शब्द एकत्र मिलकर कानो मे लगातार आघात कर रहे है। कभी-कभी देखोगे, आलोक के छोटे-छोटे कण हवा में तैर रहे है और क्रमश कुछ-कुछ बड़े होते जा रहे हैं। जब ये लक्षण प्रकाशित होगे, तब समझना कि तुम द्रुत गति से साधना मे उन्नति कर रहे हो।
जो योगी होने की इच्छा करते है और कठोर अभ्यास करते हैं, उन्हें पहली अवस्था मे आहार के सम्बन्ध मे कुछ विशेष सावधानी रखनी होगी। जो शीघ्र उन्नति करने की इच्छा करते है, वे यदि कुछ महीने केवल दूध और अन्न आदि निरामिष भोजन पर रह सके, तो उन्हे साधना में बडी सहायता मिलेगी। किन्तु जो लोग दूसरे दैनिक कामो के साथ थोडा-बहुत अभ्यास करना चाहते है, उनके लिए अधिक भोजन न करने से ही काम बन जायगा। उन्हे खाद्य के सम्बन्ध में उतना विचार करने की आवश्यकता नही, वे जो इच्छा हो वही खा सकते है।
जो कठोर अभ्यास करके शीघ्र उन्नति करना चाहते हैं, उन्हे आहार के सम्बन्ध में विशेष सावधान रहना चाहिए। देह-यंत्र धीरे-धीरे जितना ही सूक्ष्म होता जाता है, उतना ही तुम देखोगे कि एक सामान्य अनियम से भी तुम्हारे सारे शरीर के भीतर बहुत बड़ा अनमेल उपस्थित हो जायगा। जब तक मन