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रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary

by सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री)

DevanagariHindipublished799 pages

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हिन्दी अनुवाद की भूमिका अयुर्वेद में रसशास्त्र की कितनी महत्ता है यह बात आजकल के प्रतिदिन के व्यवहार में आनेवाली रसचिकित्सा पद्धति के अनुसरण करनेवाले किसी से छिपी नहीं है । यही नहीं रसशास्त्र में धातुविद्या का भी विशद् वर्णन पाया जाता है, जिसके लिए अभी वैद्यसमुदाय को बहुत कुछ करने को बाकी है । परन्तु चिकित्सा के लिए रसशास्त्र का अध्ययन-अध्यापन तथा क्रियात्मक प्रयोग करने पर कई बार यह कठिनाई उपस्थित हो जाती है । रसचिकित्सा में व्यवहार में आनेवाले खनिज- द्रव्यों का शोधन मारण आदि किस शास्त्र के अनुसार विधि से करने पर उत्तम गुणदायक हो सकता है—किससे नहीं ? इसके साथ ही यह भी देखना होता है कि अमुक विधि का अनुसरण करने से उसमें अधिक व्यय तथा समय का तो उपयोग नहीं होता जिससे हम उसके उपयोग अथवा लाभ से वञ्चित रह जायें । इन सब बातों का चिर- काल से विचार करते हुए ही रसचिकित्सा में काम आनेवाले प्रसिद्ध खनिज द्रव्योंके विज्ञान की कोई ऐसी पुस्तक हो जिसमें खनिजों की प्रकृति, प्राप्ति और गुण दोष आदि का वर्णन आयुर्वेददृष्टि से उत्तम और सरल हो, जिसके अनुसार उनका शोधन-मारण सही रूप में हो सके और उसके उपयोग का भी ज्ञान अच्छी तरह हो जाय । इसके साथ ही अपना और अन्य रसचिकित्साधुरीण वैद्यों का भी उनके विषय में पूर्ण अनुभव प्रकट हो जाय, जिससे रसचिकित्सा का महत्त्व और सद्यःफलप्रद चमत्कार सब के सामने बड़ी सरलता के साथ आ जाय । इसी आवश्यक कार्य को यथासम्भव पूरा करने के लिए उक्त गुणसम्पन्न पुस्तक की अत्यन्तावश्यकता थी कि सर्वसाधारण के लिए हिन्दी भाषा में संस्कृतमय रसशास्त्रों के निचोड़ के रूप में एक पुस्तक हो । सौभाग्य से लाला मोतीलाल बनारसीदास फर्म के मालिक श्री सुन्दरलालजी ने भी यही आग्रह कई बार दुहराया । इस बात को दृष्टि में रखते हुए रसशास्त्र की पुस्तकों का मैंने इस प्रकार निरीक्षण करना आरम्भ किया कि किस रसशास्त्र सम्बन्धी पुस्तक में विषयविन्यास