रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)
Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary
by सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री)
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उत्तम विधि से वर्णित है। मेरी दृष्टि में आधुनिक काल में लिखी हुई स्व० कविराज सदानन्द शास्त्री कृत रसतरंगिणी बहुत उत्तम सिद्ध हुई। अतः मैंने उसी का सरल हिन्दी अनुवाद 'रस विज्ञान' नाम से यह लिखा है। इस पुस्तक में प्रकरण के स्थान-स्थान पर उन पाश्चात्य योगों का भी दिग्दर्शन करा दिया गया है, जो एक रसचिकित्सक को जानने जरूरी हैं। साथ ही यथासम्भव खनिजादि द्रव्यों का परिचय, उनमें पाये जानेवाले तत्वों का विश्लेषण, उपयोग-विधि और उनके योगों का भी वर्णन किया गया है, जिससे रसचिकित्सक आधुनिक रसविज्ञान से भी परिचित हो जायें। यदि यह चिरकालीन धारणा क्रियात्मक रूप धारण कर रसशास्त्र के प्रेमियों के लिए उपयोगी सिद्ध हुई तो मैं अपनी धारणा और प्रयत्न को सफल समझूँगा। धर्मानंद