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रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary

by सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री)

DevanagariHindipublished799 pages

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पञ्चदशस्तरङ्गः ३६१

रासायनिक विधि से धातु, मद्यसार, तैल, ग्लिसरीन आदि में नहीं घुलते हैं। इससे यह भी धातु शब्द से ज्ञात हो सकता है जो द्रव्य हमारे शरीर में आभा- प्रभा के उत्पादक हों और जिससे हमारे शरीर में विद्युत् धारा वातिक गति हो और जिससे शरीर में रासायनिक परिवर्तन के साथ शरीर की वृद्धि हो वे सब धातु शब्द से कहे जा सकते हैं। इसी परीक्षा से आज तक ६८ धातुओं का वैज्ञानिकों ने पता लगाया है। धातूनां नामपरिगणनम् स्वर्णं तारं तथा ताम्र वाङ्गं सीसकमेव च। यशदं च तथा लोहं सप्तैते धातवः स्मृताः ॥२॥ सुवर्णचन्द्रलोहार्के वङ्गाहियशदायसम् । लोहसप्तकमाख्यातं सप्तलोहञ्च तन्मतम् ॥३॥ धातूनां नामपरिगणनं खनिषूपलभ्यमानानाम्। मिश्रकधातुवर्णनं पृथक् करिष्यते। तारं रजतम्, सुवर्णचन्द्रलोहेत्यादिना प्रकारान्तरेण सप्तलोहनिर्देशः धातुलोहशब्दयोः परस्परं पर्यायनिर्णायकः। प्राचीनतन्त्रेषु लोहशब्देनापि सप्तानां परिगणनात्। तत्र चन्द्रलोहं रजतम्। अर्कस्ताम्रम्। अहिः सीसकम्। स्पष्टमन्यत् ॥ २-३ ॥ भा.टी.—सोना, चाँदी, ताँबा, राँगा, सीसा, जस्ता तथा लोहा, ये सात धातु कहे जाते हैं। इन्हीं को लोहसप्तक अथवा सप्तलोह भी कहा जाता है ॥२-३॥ वक्तव्य—धातुपरिगणन में दो वार एक ही चीज को कहा गया है। इसका अभिप्राय यह है कि धातु और लोह ये दोनों परस्पर पर्यायवाचक हैं। अर्थात् लोह (Iron) को भी कहते हैं और सब स्वर्ण रजत आदि को भी लोह कहा जाता है। क्योंकि प्राचीन ग्रन्थों में कर्षार्थवाची "लृह" धातु से लोह शब्द बनाया गया है। क्योंकि सम्पूर्ण धातुएँ पृथिवी के अन्तराल से कर्षण (निका- लना या खींचना) की जाती हैं। इससे एक दूसरा भाव भी ज्ञात होता है कि पृथ्वि से स्वतन्त्र रूप में प्राप्त होनेवाले लोह को ही धातु शब्द से कहा जाता है; न कि पीतल तथा कांसा मिश्रित धातुओं को। इसीलिए 'रसरत्न-समुच्चय' में धातुओं को तीन भागों में विभक्त किया है। स्वर्ण, चांदी, ताँबा, कान्त तथा फौलाद को शुद्धलोह और सीस तथा रांगा को पूतिलोह और पीतल, कांसा को मिश्रलोह शब्द से लिखा है। धातुओं की संख्या में मतभेद देखा जाता है। शार्ङ्गधर स्वर्ण, रजत, पीतल, तांबा, सीसा, रांगा तथा फौलाद को सात धातु