BharatKosha
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1062 of 1855

Read in context
Page 1062

शीघ्र ही अन्न दें. जो इंद्र स्तोताओं को संपूर्ण धन देते थे, वे ही मनुष्यों को उत्तम धन दें. (४) नू इन्द्र राये वरिवस्कृधी न आ ते मनो ववृत्याम मघाय. गोमदश्वावद्रथवद्वयन्तो यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः.. (५) हे इंद्र! धनप्राप्ति के लिए शीघ्र धन दो. हम पूज्य स्तुतियों द्वारा तुम्हारा मन अपनी ओर खींच लेंगे. तुम हमें गायों, अश्वों एवं रथों का स्वामी बनाओ एवं कल्याणसाधनों द्वारा हमारी सदा रक्षा करो. (५) सूक्त—२८ देवता—इंद्र ब्रह्मा ण इन्द्रोप याहि विद्वानर्वाञ्चस्ते हरयः सन्तु युक्ताः. विश्वे चिद्धि त्वा विहवन्त मर्ता अस्माकमिच्छृणुहि विश्वमिन्व.. (१) हे इंद्र! तुम जानते हुए हमारी स्तुतियों के समीप आओ. तुम्हारे घोड़े हमारे सामने ही रथ में जुड़े हैं. हे सबको प्रसन्न करने वाले इंद्र! यद्यपि तुम्हें सभी लोग बुलाते हैं, फिर भी तुम हमारी पुकार सुनो. (१) हवं त इन्द्र महिमा व्यानड् ब्रह्म यत्पासि शवसिन्नृषीणाम्. आ यद्वज्रं दधिषे हस्त उग्र घोरः सन्क्रत्वा जनिष्ठा अषाळ्हः.. (२) हे शक्तिशाली इंद्र! जिस समय तुम ऋषियों के स्तोत्रों की रक्षा करते हो, उस समय तुम्हारी महिमा स्तुतिकर्त्ता को व्याप्त करे. हे उग्र इंद्र! जिस समय तुम अपने हाथ में वज्र पकड़ते हो, उस समय कर्म द्वारा भयंकर बनकर शत्रुओं को असहनीय हो जाते हो. (२) तव प्रणीतीन्द्र जोहुवानान्संत्यन्नृन्न रोदसी निनेथ. महे क्षत्राय शवसे हि जज्ञेऽतूतुर्जिं चित्तूतूजिरशिश्रत्.. (३) हे इंद्र! जो लोग तुम्हारे कहने के अनुसार तुम्हारी बार-बार स्तुति करते हैं, उन्हें तुम लोक एवं धरती पर स्थापित करते हो. तुमने महान् शक्ति एवं धन लेने के लिए जन्म लिया है. तुम्हारा यजमान यज्ञरहितों की हिंसा करता है. (३) एभिर्न इन्द्राहभिर्दशस्य दुर्मित्रासो हि क्षितयः पवन्ते. प्रति यच्चष्टे अनृतमनेना अव द्विता वरुणो मायी नः सात्.. (४) हे इंद्र! तुम्हारी मित्रता का ढोंग करने वाले दुष्ट लोग आ रहे हैं. इनसे धन छीनकर हमें दो. पाप नष्ट करने वाले एवं बुद्धिमान् वरुण हमारा जो पाप देखें. उससे हमें हर प्रकार से छुड़ाएं. (४) वोचेमेदिन्द्रं मघवानमेनं महो रायो राधसो यद्ददन्नः. ebook converter DEMO Watermarks*

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित) · Page 1062 of 1855 · BharatKosha