ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextयो अर्चतो ब्रह्मकृतिमविष्ठो यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः.. (५) हम उसी धनस्वामी इंद्र की स्तुति करते हैं, जिसने हमें आराधना के योग्य महान् धन दिया एवं स्तोता के स्तुतिकर्म की रक्षा की. हे इंद्र! तुम कल्याणसाधनों से हमारी सदा रक्षा करो. (५) सूक्त—२९ देवता—इंद्र अयं सोम इन्द्र तुभ्यं सुन्व आ तु प्र याहि हरिवस्तदोकाः. पिबा त्व१स्य सुषुतस्य चारोर्ददो मघानि मघवन्न्नियानः.. (१) हे इंद्र! यह सोम तुम्हारे लिए निचोड़ा गया है. हे हरि नामक अश्वों वाले इंद्र! उसे सेवन करने हेतु शीघ्र आओ. भली प्रकार निचोड़े गए इस सुंदर सोमरस को पिओ. हे धनस्वामी इंद्र! हमारी याचना सुनकर हमें धन दो. (१) ब्रह्मन्वीर ब्रह्मकृतिं जुषाणोऽर्वाचीनो हरिभिर्याहि तूम्य्. अस्मिन्न् षु सवने मादयस्वोप ब्रह्माणि शृणव इमा नः.. (२) हे महान् एवं शक्तिशाली इंद्र! तुम स्तुतियों को सुनते हुए अपने घोड़ों की सहायता से शीघ्र हमारी ओर आओ. तुम इस यज्ञ में भली प्रकार प्रमुदित बनो एवं हमारी इन स्तुतियों को सुनो. (२) का ते अस्त्यरङ्कृतिः सूक्तैः कदा नूनं ते मघवन् दाशेम. विश्वा मतीरा ततने त्वायाधा म इन्द्र शृणवो हवेमा.. (३) हे इंद्र! हमारे द्वारा की हुई स्तुतियों द्वारा तुम्हारी शोभा कैसे होती है? हे धनस्वामी इंद्र! हम कब तुम्हें प्रसन्न करें? मैं तुम्हारी कामना करता हुआ ही सब स्तुतियां बोलता हूं, इसलिए मेरी इन स्तुतियों को सुनो. (३) उतो घा ते पुरुष्या३ इदासन्त्येषां पूर्वेषामशृणोऋषीणाम्. अधाहं त्वा मघवञ्जोहवीमि त्वं न इन्द्रासि प्रमतिः पितेव.. (४) हे इंद्र! वे सब प्राचीन ऋषि मानवहितकारी थे, जिनकी स्तुतियां तुमने सुनीं. हे धनस्वामी इंद्र! इसलिए मैं तुम्हें बार-बार बुलाता हूं. तुम पिता के समान मेरे बंधु हो. (४) वोचेमेदिन्द्रं मघवानमेनं महो रायो राधसो यद्ददन्नः. यो अर्चतो ब्रह्मकृतिमविष्ठो यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः.. (५) हम उसी धनस्वामी इंद्र की स्तुतियां करते हैं. जिसने हमें आराधना के योग्य महान् धन दिया एवं स्तोता के स्तुतिकार्य की रक्षा की. हे इंद्र! तुम कल्याणसाधनों द्वारा हमारी सदा रक्षा ebook converter DEMO Watermarks*