ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
Page 1090 of 1855
Read in contextतेजस्वी व धनों के पालक सविता देव हमारे लिए सब ओर से धनों को प्रेरित करते हैं. वे विस्तीर्ण गति वाले रूप को धारण करते हुए इस समय हमें मानवों के भोग में आने वाला धन दें. (३) इमा गिरः सवितारं सुजिह्वं पूर्णगभस्तिमूळते सुपाणिम्. चित्रं वयो बृहदस्मे दधातु यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः.. (४) ये वाणियां शोभनजिह्वा वाले, संपूर्ण धनयुक्त एवं शोभनपाणि वाले सविता की स्तुति करती हैं. वे हमें विचित्र एवं महान् धन दें. हे देवो! तुम कल्याणसाधनों द्वारा हमारा सदा पालन करो. (४) सूक्त—४६ देवता—रुद्र इमा रुद्राय स्थिरधन्वने गिरः क्षिप्रेषवे देवाय स्वधान्वे. अषाळहाय सहमानाय वेधसे तिग्मायुधाय भरता शृणोतु नः.. (१) हे स्तोताओ! तुम दृढ़ धनुष वाले, शीघ्रगामी बाणों वाले, अन्नयुक्त अपराजित, सबको जीतने वाले, बनाने वाले तथा तीक्ष्ण आयुधों के स्वामी रुद्र की स्तुति करो. वे हमारी स्तुति सुनें. (१) स हि क्षयेण क्षम्यस्य जन्मनः साम्राज्येन दिव्यस्य चेतति. अवन्नवन्तीरुप नो दुरश्चरानमीवो रुद्र जासु नो भव.. (२) रुद्र को स्वर्ग एवं पृथ्वी पर रहने वाले ऐश्वर्य द्वारा जाना जा सकता है. हे रुद्र! हमारी प्रजाएं तुम्हारी स्तुतियां करती हैं. तुम उनकी रक्षा करते हुए हमारे घर आओ एवं उसे रोगहीन बनाओ. (२) या ते दिद्युदवसृष्टा दिवस्परि क्षमया चरिति परि सा वृणक्तु नः. सहस्त्रं ते स्वपिवात भेषजा मा नस्तोकेषु तनयेषु रीरिषः.. (३) हे रुद्र! अंतरिक्ष से छोड़ी गई बिजली जो धरती पर घूमती है, वह हमें त्याग दे. हे स्वपिवात रुद्र! तुम्हारी हजारों ओषधियां हमें मिलें. तुम हमारे पुत्र-पौत्रों की हत्या मत करना. (३) मा नो वधी रुद्र मा परा दा मा ते भूम प्रसितौ हीळितस्य. आ नो भज बर्हिषि जीवशंसे यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः.. (४) हे रुद्र! तुम हमें मत मारना एवं हमारा त्याग मत करना. हम तुम्हारे क्रोध के बंधन में न रहें. तुम प्राणियों द्वारा प्रशंसित यज्ञ का हमें भागी बनाओ. हे देवो! तुम कल्याणसाधनों द्वारा ebook converter DEMO Watermarks*