ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
Page 1130 of 1855
Read in contextउषाएं अंतरिक्ष के भाग में तेज फैलाती हैं एवं प्रजा के समान मिलकर अंधकारनाश के लिए प्रयत्न करती हैं. हे उषा! तुम्हारी किरणें अंधकार का नाश करती हैं एवं सूर्य के हाथों के समान सबको प्रकाश देती हैं. (२) अभूदुषा इन्द्रतमा मघोन्यजीजनत् सुविताय श्रवांसि. वि दिवो देवी दुहिता दधात्यङ्गिरस्तमा सुकृते वसूनि.. (३) सर्वश्रेष्ठ स्वामिनी एवं धनशालिनी उषा उत्पन्न हुई है एवं उसने सबके कल्याण के लिए अन्न पैदा किया है. स्वर्ग की पुत्री एवं अतिशय गतिशील उषा देवी शोभनकर्म करने वाले के लिए धन धारण करती है. (३) तावदुषो राधो अस्मभ्यं रास्व यावत्स्तोतृभ्यो अरदो गृणाना. यां त्वा जञ्जुर्वृषभस्य रवेण वि दृळ्हस्य दुरो अद्रेरौर्णोः.. (४) हे उषा! हमें भी तुम उतना धन दो, जितना तुमने प्राचीन स्तोताओं की स्तुति सुनकर दिया था. लोग वृषभ नामक स्तोत्र के स्वर से तुम्हें जानते हैं. तुमने पणियों द्वारा गायों की चोरी के समय मजबूत द्वार खोला था. (४) देवंदेवं राधसे चोदयन्त्यस्मद्र्यक्सूनृता ईरयन्ती. व्युच्छन्ती नः सनये धियो धा यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः.. (५) हे उषा! प्रत्येक स्तोता को धन के लिए प्रेरित करती हुई, शोभनवचनों को हमारी ओर भेजती हुई एवं अंधकार का नाश करती हुई तुम हमारे लिए धनदान हेतु अपनी बुद्धि स्थिर करो. हे देवी! तुम अपने कल्याणसाधनों द्वारा हमारी रक्षा करो. (५) सूक्त—८० देवता—उषा प्रति स्तोमेभिरुषसं वसिष्ठा गीर्भिर्विप्रासः प्रथमा अबुध्रन्. विवर्तयन्तीं रजसी समन्ते आविष्कृण्वतीं भुवनानि विश्वाँ.. (१) वसिष्ठगोत्रीय विप्र स्तुतियों एवं मंत्रसमूहों द्वारा उषा को सभी लोगों से पहले जगाते हैं. उषा समान भागों वाली द्यावा-पृथिवी को ढक लेती है एवं सारे भुवनों को प्रकट करती है. (१) एषा स्या नव्यमायुर्दधाना गूढ्वी तमो ज्योतिषोषा अबोधि. अग्र एति युवतिरह्ऱयाणा प्राचिकितत्सूर्यं यज्ञमग्निम्.. (२) यह वही उषा है जो नवयौवन धारण करती हुई एवं अपने तेज द्वारा छिपे हुए अंधकार को नष्ट करती हुई सबको जगाती है. उषा लज्जाशील युवती के समान सूर्य के आगे-आगे