ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextचलती है तथा सूर्य, अग्नि और यज्ञ को प्रकट करती है. (२) अश्वावतीर्गोमदीर्न उषासो वीरवतीः सदमुच्छन्तु भद्राः. घृतं दुहाना विश्वतः प्रपीता यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः.. (३) अश्वों एवं गायों से युक्त, पुत्र देने वाली तथा प्रशंसनीय उषाएं अंधकार को सदा दूर करें. उषाएं जल दुहती हुई सब जगह बढ़ती हैं. हे देवो! तुम कल्याणसाधनों द्वारा हमारी सदा रक्षा करो. (३) सूक्त—८१ देवता—उषा प्रत्यु अदर्श्यायत्यु१च्छन्ती दुहिता दिवः. अपो महि व्ययति चक्षसे तमो ज्योतिष्कृणोति सूनरी.. (१) स्वर्ग की पुत्री उषा अंधकार मिटाती हुई एवं आती हुई दिखाई देती है. सब लोग देख सकें, इस हेतु यह रात के महान् अंधकार का नाश करती है. मानवों की शोभन नेत्री उषा प्रकाश करती है. (१) उदुस्रियाः सृजते सूर्यः सचाँ उद्यन्नक्षत्रमर्चिवत्. तवेदुषो व्युषषि सूर्यस्य च सं भक्तेन गमेमहि.. (२) सूर्य अपनी किरणों को एक साथ बिखेरते हैं एवं स्वयं प्रकट होकर आकाश के नक्षत्रों को दीप्तिशाली बनाते हैं. हे उषा! तुम्हारे और सूर्य के चमकने पर हम अन्न से मिलें. (२) प्रति त्वा दुहितर्दिव उषो जीरा अभुत्स्महि. या वहसि पुरु स्पार्हं वनन्वनि रत्नं न दाशुषे मयः.. (३) हे स्वर्गपुत्री उषा! शीघ्रतापूर्वक कर्म करने वाले हम तुम्हें जगाएं. हे धनस्वामिनी उषा! तुम विशाल धन के समान ही यजमान के लिए रत्न एवं सुख का वहन करती हो. (३) उच्छन्ती या कृणोषि मंहना महि प्रख्यै देवि स्वर्दृशे. तस्यास्ते रत्नभाज ईमहे वयं स्याम मातुर्न सूनवः.. (४) हे अंधकारनाशिनी एवं महिमाशालिनी महादेवी उषा! तुम सब जग को जगाने एवं देखने में समर्थ बनाती हो. हे रत्नस्वामिनी! हम तुमसे याचना करते हैं. हम तुम्हें माता के लिए पुत्र के समान प्रिय हों. (४) तच्चित्रं राध आ भरोषो यद्दीर्घश्रुत्तमम्. यत्ते दिवो दुहितर्मर्तभोजनं तद्रास्व भुनजामहै.. (५) ebook converter DEMO Watermarks*