ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextसभी नदियों में पवित्र एवं पर्वत से निकलकर सागर तक जाने वाली सरस्वती नदी ने ही केवल राजा नहुष की प्रार्थना को समझा. सरस्वती ने नहुष को सारे संसार का पर्याप्त धन प्रदान करके दूध का दोहन किया था. (२) स वावृधे नर्यो योषणासु वृषा शिशुर्वृषभो यज्ञियासु. स वाजिनं मघवद्भ्यो दधाति वि सातये तन्वं मामृजीत.. (३) मानवों का हित एवं वर्षा करने वाले सरस्वन् नामक वायु यज्ञ के योग्य स्त्री अर्थात् जरासमूह के बीच वृद्धि को प्राप्त हुए. वे हव्य धारण करने वाले यजमानों को शक्तिशाली संतान देते हैं एवं उनके कल्याण के लिए शरीर का संस्कार करते हैं. (३) उत स्या नः सरस्वती जुषाणोप श्रवत् सुभगा यज्ञे अस्मिन्. मितज्ञुभिर्नमस्यैरियाना राया युजा चिदुत्तरा सखिभ्यः.. (४) शोभनधन वाली सरस्वती प्रसन्न होकर इस यज्ञ में हमारी स्तुति सुनें. घुटने टेककर समीप जाने वाले देवों से युक्त सरस्वती धन से नित्य संपन्न होकर अपने मित्रों के लिए क्रमशः दया वाली बनें. (४) इमा जुह्वाना युष्मदा नमोभिः प्रति स्तोमं सरस्वति जुषस्व. तव शर्मन्प्रियतमे दधाना उपस्थेयाम शरणं न वृक्षम्.. (५) हे सरस्वती! इस यज्ञ का हवन करते हुए हम लोग स्तुतियों द्वारा तुमसे धन प्राप्त करेंगे. तुम हमारी स्तुति स्वीकार करो. हम तुम्हारे सर्वाधिक प्रिय घर में रहते हुए तुम्हारे साथ इस प्रकार मिलेंगे, जिस प्रकार पक्षी अपने आश्रयस्थल वृक्ष से मिलते हैं. (५) अयमु ते सरस्वति वसिष्ठो द्वारावृतस्य सुभगे व्यावः. वर्ध शुभ्रे स्तुवते रासि वाजान् यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः.. (६) हे शोभनधन वाली सरस्वती! यह वसिष्ठ तुम्हारे लिए यज्ञ के द्वार खोलता है. हे उज्ज्वल वर्ण वाली सरस्वती देवी! तुम वृद्धि प्राप्त करो एवं स्तोता को अन्न दो. हे देवो! तुम कल्याणसाधनों द्वारा हमारा सदा पालन करो. (६) सूक्त—९६ देवता—सरस्वती व सरस्वन् बृहदु गायिषे वचोऽसुर्या नदीनाम्. सरस्वतीमिन्महया सुवृक्तिभिः स्तोमैर्वसिष्ठ रोदसी.. (१) हे वसिष्ठ! तुम नदियों में सर्वाधिक शक्तिशालिनी सरस्वती के लिए स्तोत्र का गान करो एवं द्यावा-पृथिवी में स्थित सरस्वती की पूजा दोषहीन स्तोत्रों द्वारा करो. (१) ebook converter DEMO Watermarks*