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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

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चारों ओर जल बरसाते हैं. (४) इदं वचः पर्जन्याय स्वराजे हृदो अस्त्वन्तरं तज्जुजोषत्. मयोभुवो वृष्टयः सन्तवस्मे सुपिप्पला ओषधीर्देवगोपाः.. (५) स्वयं प्रदीप्त पर्जन्य के निमित्त यह स्तोत्र बनाया गया है. पर्जन्य यह स्तोत्र स्वीकार करें. यह उनके मन को भावे. हमारा सुख निर्माण करने वाली वर्षा हो. पर्जन्यों द्वारा सुरक्षित ओषधियां फलवती हों. (५) स रेतोधा वृषभः शश्वतीनां तस्मिन्नात्मा जगतस्तस्थुषश्च. तन्म ऋतं पातु शतशारदाय यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः.. (६) वे पर्जन्य अनेक ओषधियों के लिए बैल के समान वीर्य धारण करते हैं. स्थावर और जंगम की आत्मा पर्जन्य में ही स्थित है. पर्जन्य द्वारा बरसाया हुआ जल सौ वर्ष तक जीवित रहने के लिए मेरी रक्षा करे. हे देवो! तुम कल्याणसाधनों द्वारा हमारी सदा रक्षा करो. (६) सूक्त—१०२ देवता—पर्जन्य पर्जन्याय प्र गायत दिवस्पुत्राय मीळहुषे. स नो यवसमिच्छतु.. (१) हे स्तोताओ! अंतरिक्ष के पुत्र एवं सेचन करने वाले पर्जन्य के लिए स्तुतियां गाओ. (१) यो गर्भोमोषधीनां गवां कृणोत्यर्वताम्. पर्जन्यः पुरुषीणाम्.. (२) पर्जन्य देव ओषधियों, गायों, घोड़ियों एवं स्त्रियों में गर्भ धारण करते हैं. (२) तस्मा इदास्ये हविर्जुहोता मधुमत्तमम्. इळां नः संयतं करत्.. (३) उन्हीं पर्जन्य देव के निमित्त देवों के मुखरूप अग्नि में अतिशय मधुर हव्य का होम करो. पर्जन्य हमारे लिए निश्चित अन्न दें. (३) सूक्त—१०३ देवता—मंडूक संवत्सरं शशयाना ब्राह्मणा व्रतचारिणः. वाचं पर्जन्यजिन्वितां प्र मण्डूका अवादिषुः.. (१) मेंढक व्रत करने वाले स्तोता की तरह एक वर्ष तक सोने के बाद बादलों के प्रति प्रसन्नताकारक वाणी बोलते हैं. (१) दिव्या आपो अभि यदेनमायन्दृतिं न शुष्कं सरसी शयानम्. ebook converter DEMO Watermarks*