ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
Page 1156 of 1855
Read in contextतुम्हें उचित है? तुमने युद्ध में दूसरा रूप धारण किया था. तुम हमसे अपना रूप मत छिपाओ. (६) वषट् ते विष्णवास आ कृणोमि तन्मे जुषस्व शिपिविष्ट हव्यम्. वर्धन्तु त्वा सुष्टुतयो गिरो मे यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः.. (७) हे विष्णु! मैं यज्ञ में तुम्हारे लिए अपने मुख से वषट् शब्द बोलता हूं. हे तेजस्वी विष्णु! तुम हमारे हव्य को स्वीकार करो. हमारी शोभनस्तुति के वाक्य तुम्हारी वृद्धि करें. हे देवो! तुम कल्याणसाधनों द्वारा हमारा सदा पालन करो. (७) सूक्त—१०१ देवता—पर्जन्य तिस्रो वाचः प्र वद ज्योतिरग्रा या एतद्दुह्रे मधुदोधमूहः. स वत्सं कृण्वन् गर्भमोषधीनां सद्यो जातो वृषभो रोरवीति.. (१) हे ऋषि! उन्हीं तीन वचनों को बोलो, जिनके अग्र भाग में ओम है एवं जो जल का दोहन करते हैं. पर्जन्य अपने साथ रहने वाली बिजलीरूपी अग्नि को उत्पन्न करते हैं एवं ओषधियों में गर्भ धारण करते हैं. वे शीघ्र उत्पन्न होकर बैल के समान बार-बार शब्द करते हैं. (१) यो वर्धन ओषधीनां यो अपां यो विश्वस्य जगतो देव ईशे. स त्रिधातु शरणं शर्म यंसत्त्रिवर्तु ज्योतिः स्वभिष्ट्य१स्मे.. (२) ओषधियों एवं जल को बढ़ाने वाले तथा सारे संसार के स्वामी पर्जन्य तीन प्रकार की भूमियों से युक्त घर एवं सुख प्रदान करें. पर्जन्य हमें तीन ऋतुओं में रहने वाली शोभन ज्योति दें. (२) स्तरीरु त्वद्भवति सूत उ त्वद्यथावशं तन्वं चक्र एषः. पितुः पयः प्रति गृभ्णाति माता तेन पिता वर्धते तेन पुत्रः.. (३) पर्जन्य का एक रूप बच्चे देने में असमर्थ बूढ़ी गाय के समान है और दूसरा रूप गाय के समान जल प्रसव करने वाला है. पर्जन्य इच्छानुसार अपना शरीर बदलते हैं. धरती माता भूलोकरूपी पिता से जलरूपी दूध लेती है. इसके पिता एवं प्राणिवर्गरूपी पुत्र बढ़ते हैं. (३) यस्मिन् विश्वानि भुवनानि तस्थुस्तिस्रो द्यावस्त्रेधा सस्रुरापः. त्रयः कोशास उपसेचनासो मध्वः श्चोतन्त्यभितो विरप्शम्.. (४) पर्जन्य देव वे हैं, जिन में सभी भुवन स्थित हैं. उन में द्युलोक आदि तीनों लोक स्थित हैं एवं जिन में तीन स्थानों से जल टपकता है. सबके भिगोने वाले तीन प्रकार के मेघ पर्जन्य के ebook converter DEMO Watermarks*