ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextइंद्र उन कपटियों को मारने के लिए अपना वज्र तेज करते हैं. इंद्र उन राक्षसों के ऊपर अपना वज्र शीघ्र फेंकें. (२०) इन्द्रो यातूनामभवत् पराशरो हविर्मथीनामभ्या३ विवासताम्. अभीदु शक्रः परशुर्यथा वनं पात्रेव भिन्दन्त्सत एति रक्षसः.. (२१) इंद्र हिंसकों की भी हिंसा करने वाले हैं. जिस प्रकार कुल्हाड़ा वनों को काटता है एवं हथौड़ा बर्तनों को पीटता है, उसी प्रकार राक्षसों को नष्ट करते हुए इंद्र हव्य-मंथन करने वाले एवं अपने सम्मुख उपस्थित भक्तों की रक्षा के लिए आते हैं. (२१) उलूकयातुं शुशुलूकयातुं जहि श्वयातुमुत कोकयातुम्. सुपर्णयातुमुत गृध्रयातुं दृषदेव प्र मृण रक्ष इन्द्र.. (२२) हे इंद्र! जो राक्षस उल्लुओं के समान रात में लोगों की हिंसा करते हैं, जो भेड़िया, कुत्ता, चकवा, बाज एवं गिद्ध के समान लोगों की हिंसा करते हैं, उन्हें अपने पाषाणरूपी वज्र द्वारा नष्ट कर दो. (२२) मा नो रक्षो अभि नड्यातुमावतामपोच्छतु मिथुना या किमीदिना. पृथिवी नः पार्थिवात् पात्वंहसोऽन्तरिक्षं दिव्यात्पात्वस्मान्. (२३) हमें राक्षस न घेरें. कष्ट देने वाले राक्षसों के जोड़े हमसे दूर हों. ये राक्षस क्या शब्द कहते हुए चक्कर लगाते हैं? पृथ्वी पार्थिव पाप से हमारी रक्षा करे एवं अंतरिक्ष दिव्य पाप से हमें बचाए. (२३) इन्द्र जहि पुमांसं यातुधानमुत स्त्रियं मायया शाशदानाम्. विग्रीवासो मूरदेवा ऋदन्तु मा ते दृशन्त्सूर्यमुच्चरन्तम्.. (२४) हे इंद्र! नर राक्षस का नाश करो एवं माया द्वारा दूसरों की हिंसा करने वाली मादा राक्षसी को भी नष्ट करो. विनाशरूपी क्रीड़ा करने वाले राक्षस धड़ के रूप में पड़े हों एवं उगते हुए सूर्य को न देख सकें. (२४) प्रति चक्ष्व वि चक्ष्वेन्द्रश्च सोम जागृतम्. रक्षोभ्यो वधमस्यतमशनिं यातुमद्द्वयः.. (२५) हे सोम! तुम एवं इंद्र प्रत्येक को भांति-भांति से देखो एवं जागो. तुम राक्षसों के ऊपर अपना वज्ररूप आयुध फेंको. (२५) ebook converter DEMO Watermarks*