ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextपवमान नि तोशसे रयिं सोम श्रवाय्यम्. प्रियः समुद्रमा विश.. (२३) हे शुद्ध होते हुए सोम! तुम शत्रुओं के प्रशंसा योग्य धन को सभी प्रकार नष्ट करते हो. हे प्रिय सोम! तुम द्रोणकलश में जाओ. (२३) अपघ्नन् पवसे मृधः क्रतुवित्सोम मत्सरः. नुदस्वादेवयुं जनम्.. (२४) हे नशीले एवं शत्रुओं को नष्ट करने वाले सोम! तुम हमें बुद्धि देते हुए छनते हो. तुम देवों की अभिलाषा न करने वाले राक्षसों को समाप्त करो. (२४) पवमाना असृक्षत सीमाः शुक्रास् इन्दवः. अभि विश्वानि काव्या.. (२५) स्तुति वाक्यों को सुनने वाले, उज्ज्वल, दीप्तिशाली एवं शुद्ध होते हुए सोम ऋत्विजों द्वारा निर्मित होते हैं. (२५) पवमानास आशवः शुभ्रा असृग्रमिन्दवः. घ्नन्तो विश्वा अप द्विषः.. (२६) ऋत्विजों द्वारा शीघ्र गति वाले, शोभन, दीप्तिशाली एवं शुद्ध होते हुए सोम, शत्रुओं का हनन करने के लिए निर्मित होते हैं. (२६) पवमाना दिवस्पर्यन्तरिक्षादसृक्षत. पृथिव्या अधि सानवि.. (२७) शुद्ध होते हुए सोम स्वर्ग एवं धरती के उन्नत स्थानों एवं देवयज्ञ में निर्मित होते हैं. (२७) पुनानः सोम धारयेन्दो विश्वा अप स्रिधः. जहि रक्षांसि सुक्रतो.. (२८) हे दीप्तिशाली एवं शोभनकर्म वाले सोम! तुम धारा के रूप में छनते हुए सभी शत्रुओं और राक्षसों को मारो. (२८) अपघ्नन्त्सोम रक्षसोऽभ्यर्ष कनिक्रदत्. द्युमन्तं शुष्ममुत्तमम्.. (२९) हे सोम! तुम राक्षसों का हनन करते हुए एवं शब्द करते हुए हमें दीप्तिशाली एवं श्रेष्ठ बल दो. (२९) अस्मे वसूनि धारय सोम दिव्यानि पार्थिवा. इन्दो विश्वानि वार्या.. (३०) हे दीप्तिशाली सोम! तुम द्युलोक एवं धरती से संबंधित सभी वरण करने योग्य धनों को हमें दो. (३०) सूक्त—६४ देवता—पवमान सोम वृषा सोम द्युमाँ असि वृषा देव वृषव्रतः. वृषा धर्माणि दधिषे.. (१) ebook converter DEMO Watermarks*