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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1482 of 1855

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Page 1482

ये ते मदा आहनसो विहायसस्तेभिरिन्द्रं चोदय दातवे मघम्.. (५) हे सोम! हमारे कल्याण के लिए चारों ओर दौड़ो. तुम यज्ञकर्म के नेताओं द्वारा पवित्र होकर दूध, दही को ढको. तुम्हारे जो शब्दयुक्त, शत्रुघातक एवं महान् रस हैं, उनके कारण इंद्र को प्रेरित करो कि वे हमें महान् धन दें. (५) सूक्त—७६ देवता—पवमान सोम धर्ता दिवः पवते कृत्व्यो रसो दक्षो देवानामनुमाद्यो नृभिः. हरिः सृजानो अत्यो न सत्वभिर्वृथा पाजांसि कृणुते नदीष्वा.. (१) सबको धारण करने वाले, शोधन के योग्य, रसात्मक देवों के बल, ऋत्विजों द्वारा स्तुति योग्य, हरे रंग वाले, प्राणियों द्वारा उत्पन्न एवं सीखे हुए घोड़े के समान वेग वाले सोम स्वर्ग से टपकते हैं. (१) शूरो न धत्त आयुधा गभस्त्योः स्व१ः सिषासन्नथिरो गविष्टिषु. इन्द्रस्य शुष्ममीरयन्नपस्युभिरिन्दुहिन्वानो अज्यते मनीषिभिः.. (२) सोम वीर पुरुष के समान अपने दोनों हाथों में आयुध धारण करते हैं. सोम गायों को खोजने के संबंध में स्वर्ग में जाने की इच्छा से रथ वाले बने थे. इंद्र के बल को प्रेरित करते हुए सोम यज्ञकर्म के इच्छुक बुद्धिमानों द्वारा भेजे जाकर गाय के दूध में मिलाए जाते हैं. (२) इन्द्रस्य सोम पवमान ऊर्मिणा तविष्यमाणो जठरेष्वा विश. प्र णः पिन्व विद्युदभ्रेव रोदसी धिया न वाजाँ उप मासि शश्वतः.. (३) हे पवमान सोम! तुम बढ़ते हुए अपनी बहुत सी धाराओं द्वारा इंद्र के पेट में घुसो. बिजली जिस प्रकार बादलों का दोहन करती है, उसी प्रकार तुम अपने कर्मों द्वारा द्यावा- पृथिवी का दोहन करके हमें अधिक अन्न देते हो. (३) विश्वस्य राजा पवते स्वर्दृश ऋतस्य धीतिमृषिषाळवीवशत्. यः सूर्यस्यासिरेण मृज्यते पिता मतीनामसमष्टकाव्यः.. (४) जगत् के राजा सोम निचोड़ते हैं. स्वर्ग को देखने वाले इंद्र के कर्म ऋषियों से भी उत्तम है. सोम ने इंद्र के यज्ञकर्म की कामना की. सोम सूर्य की किरणों द्वारा शुद्ध होते हैं. हमारी स्तुतियों के पालनकर्त्ता सोम का कर्म कवियों से उत्कृष्ट है. (४) वृषेव यूथा परि कोशमर्षस्यपामुपस्थे वृषभः कनिक्रदत्. स इन्द्राय पवसे मत्सरिन्तमो यथा जेषाम समिथे त्वोतयः.. (५) हे अभिलाषापूरक सोम! जिस प्रकार बैल गायों के समूह में जाता है, उसी प्रकार तुम ebook converter DEMO Watermarks*