ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
by डा. गंगा सहाय शर्मा
Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)
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Read in contextअंतरिक्ष में रहकर गर्जन करते हो एवं द्रोणकलश में आते हो. तुम अत्यंत नशीले बनकर इंद्र के लिए निचुड़ते हो. तुम्हारे द्वारा रक्षित होकर हम युद्ध में विजयी बनें. (५) सूक्त—७७ देवता—पवमान सोम एष प्र कोशे मधुमाँ अचिक्रददिन्द्रस्य वज्रो वपुषो वपुष्टरः. अभीमृतस्य सुदुघा घृतश्चुतो वाश्रा अर्षन्ति पयसेव धेनवः.. (१) इंद्र के वज्र के समान, मधुर रस युक्त एवं बीजों को बोने वालों में श्रेष्ठ सोम द्रोणकलश में शब्द करते हैं. फलों का दोहन करने वाली, जल बरसाने वाली एवं शब्द करने वाली सोमकिरणें रंभाती हुई गायों के समान जाती हैं. (१) स पूर्व्यः पवते यं दिवस्परि श्येनो मथायदिषितस्तिरो रजः. स मध्व आ युवते वेविजान इत्कृशानोरस्तर्मनसाह बिभ्युषा.. (२) प्राचीन सोम निचुड़ते हैं. अपनी माता के द्वारा भेजा हुआ बाज पक्षी सोम को स्वर्ग से लाया था. सोम अपने मधुर रस को तीनों लोकों से अलग करते हैं. कृशानु नाम वाले धनुषधारी के बाणों से डरकर सोम इधर-उधर जाते हुए मधुर रस के साथ मिलते हैं. (२) ते नः पूर्वास उपरास इन्दवो महे वाजाय धन्वन्तु गोमते. ईक्षेण्यासो अह्यो३न चारवो ब्रह्मब्रह्म ये जुजुषुर्हविर्हविः.. (३) स्त्रियों के समान दर्शनीय, रमणीय, हव्य का भक्षण करने वाले, प्राचीन तथा आधुनिक सोम मुझ महान् गोस्वामी के पास अन्न पाने के लिए आवें. (३) अयं नो विद्वान्वनवद्वनुष्यत इन्दुः सत्राचा मनसा पुरुष्टुतः. इनस्र्य यः सदने गर्भमादधे गवामुरुब्जमभ्यर्षति व्रजम्.. (४) बहुत से लोगों द्वारा प्रशंसित व अग्नि की उत्तरवेदी पर वर्तमान सोम हमें मारने वाले शत्रुओं को जानकर मारें. सोम ओषधियों में गर्भ धारण करते हैं एवं हमारी दुधारू गायों के समूह की ओर जाते हैं. (४) चक्रिर्दिवः पवते कृत्व्यो रसो महाँ अदब्धो वरुणो हुरुग्यते. असावि मित्रो वृजनेषु यज्ञियोऽत्यो न यूथे वृषयुः कनिक्रदत्.. (५) सब कर्मों के कर्त्ता, कर्मकुशल, रसात्मक, अधिक गुण वाले व अपराजेय सोम इधर- उधर जाते हैं. विपत्ति आने पर सबके मित्र सोम शब्द करते हुए इस प्रकार बरसते हैं, जिस प्रकार घोड़ा घोड़ियों में जाता है. (५) ebook converter DEMO Watermarks*