BharatKosha
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

by डा. गंगा सहाय शर्मा

Source: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (origin)

DevanagariSanskritpublished1,855 pages

Page 1491 of 1855

Read in context
Page 1491

सहस्रणीथः शतधारो अद्भुत इन्द्रायेन्दुः पवते काम्यं मधु. जयन्क्षेत्रमभ्यर्षा जयन्नप उरुं नो गातुं कृणु सोम मीढ्वः.. (४) अनेक प्रकार की आंखों वाले, असीमित धाराओं से युक्त एवं अद्भुत सोम इंद्र के लिए मनचाहा मधुर रस टपकाते हैं. हे सोम! तुम हमारे लिए खेत और जल को जीतकर दशापवित्र की ओर आओ एवं जल बरसाने वाले बनकर हमारा मार्ग चौड़ा करो. (४) कनिक्रदत्कलशे गोभिरज्यसे व्य१व्ययं समया वारमर्षसि. मर्मृज्यमानो अत्यो न सानसिरिन्द्रस्य सोम जठरे समक्षरः.. (५) हे शब्द करते हुए एवं द्रोणकलश में स्थित सोम! तुम गायों के दूध-दही में मिलाए जाते हो एवं भेड़ के बालों से बने दशापवित्र के पास जाते हो. मसले जाते हुए तुम घोड़े के समान सेवा करने योग्य हो. तुम इंद्र के पेट में टपको. (५) स्वादुः पवस्व दिव्याय जन्मने स्वादुरिन्द्राय सुहवीतुनाम्ने. स्वादुर्मित्राय वरुणाय वायवे बृहस्पतये मधुमाँ अदाभ्यः.. (६) हे स्वादयुक्त सोम! तुम दिव्य जन्म वाले देवों एवं शोभन नाम वाले इंद्र के लिए रस टपकाओ. तुम मधुर रस वाले एवं दूसरों द्वारा अपराजेय हो. तुम मित्र, वरुण, वायु और बृहस्पति के लिए रस बरसाओ. (६) अत्यं मृजन्ति कलशे दश क्षिपः प्र विप्राणां मतयो वाच ईरते. पवमाना अभ्यर्षन्ति सुष्टुतिमेन्द्रं विशन्ति मदिरास इन्दवः.. (७) अध्वर्यु लोगों की दस उंगलियां घोड़े के समान गतिशील सोम को कलश में मसलती हैं. ब्राह्मणों के बीच बैठे स्तोता स्तुतियां बोलते हैं. शुद्ध होते हुए सोम जाते हैं. नशीले सोम इंद्र के उदर में प्रवेश करते हैं. (७) पवमानो अभ्यर्षा सुवीर्यमुर्वी गव्यूतिं महि शर्म सप्रथः. माकिर्नो अस्य परिभूतिरीशतेन्दो जयेम त्वया धनंधनम्.. (८) हे सोम! तुम शुद्ध होते हुए हमें शोभन शक्ति, दो कोस धरती और विशाल घर दो. तुम हमारे यज्ञकर्म से द्वेष करने वालों को हमारा स्वामी मत बनाओ. हम तुम्हारी कृपा से बहुत धन जीतें. (८) अधि द्यामस्थाद्वृषभो विचक्षणोऽरूरुचद्दिवो रोचना कविः. राजा पवित्रमत्येति रोरुवद्दिवः पीयूषं दुहते नृचक्षसः.. (९) बरसने वाले एवं विशेषद्रष्टा सोम द्युलोक में स्थित थे. सोम ने द्युलोक में तारों को चमकाया. कवि एवं राजा सोम दशापवित्र को लांघकर जाते हैं. मनुष्यों को देखने वाले सोम ebook converter DEMO Watermarks*